अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महिला संगठन
विधान (संशोधित : 21 जनवरी 1989)
वर्तमान पदाधिकारी
| अध्यक्ष | श्री श्यामसुन्दर सोनी | नागपुर |
| उपाध्यक्ष | श्री बृजमोहन बागड़ी | कलकत्ता |
| उपाध्यक्ष | जयश्री न्याति | भुसावल |
| महामंत्री | श्रीकिशन अजमेरा | जयपुर |
| अर्थमंत्री | श्री पुरूषोत्तम सिंगी | बम्बई |
| संयुक्त मंत्री | श्री मदनगोपाल तापडिया | कानुपर |
| संयुक्त मंत्री | श्री मदनमोहन बित्रानी | कलकत्ता |
| निवर्त्तमान अध्यक्ष | श्री चन्द्रमोहन जी नागौरी | ग्वालियर |
| निवर्त्तमान महामंत्री | श्री पुरूषोत्तम जी लढढा | कानपुर |
1 नाम :-
इस संस्था का नाम ''अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी युवा संगठन'' होगा, और यह अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा की एक इकाई के रूप में उसके अन्तर्गत ही कार्य करेगा।
2 कार्यक्षेत्र :-
इस संगठन का कार्यक्षेत्र भारतवर्ष एवं अन्य क्षेत्र जहां माहेश्वरी परिवार निवास करते हैं, होगा।
3 सिद्धान्त :-
संगठन, सहयोग, सेवा, संकल्प, संस्कृति, संयम, समर्पण, सादगी, अनुशासन व सुधार मुखय सिद्धान्त होंगे।
4 उद्देश्य :-
उपरोक्त सिद्धान्तों का माहेश्वरी युवक-युवतियों में प्रचार-प्रसार करके पालन कराना, तथा समस्त भारत वासियों की प्रगति के व्यापक दृष्टिकोण के साथ माहेद्गवरी समाज की समयानुकूल सर्वांगीण उन्नति करना, जिससे माहेश्वरी समाज राष्ट्र का एक प्रगतिशील घटक बना रहें।
5 सिद्धान्त व उद्देश्य की पूर्ति के साधन :-
उपरोक्त उद्देश्य की पूर्ति के लिए, शिक्षा प्रसार, आर्थिक उन्नति, सामाजिक जागृति,
1. उपरोक्त उद्देश्य की पूर्ति के लिए, शिक्षा प्रसार, आर्थिक उन्नति, सामाजिक जागृति अध्यात्मिक, सांस्कृतिक तथा शारीरिक उत्थान आदि का प्रयत्न व प्रयास करना तथा इन कार्यों को साध्य करने के लिये आवश्यक संस्थाओं की स्थापना एवं उनका संचालन अथवा उनके साथ सहयोग करना साथ ही इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए पत्र पत्रिकाओं अथवा विविध साहित्य व प्रचार सामग्री का प्रकाशन एवं प्रबन्ध करना।
2. समाज के असहाय, अपंग, अस्वस्थ निराश्रितों एवं जरूरतमंद, बच्चों, स्त्रियों एवं युवाओं को सहायता सहयोग देना।
3. बेरोजगार युवाओं का मार्गदर्शन कर उन्हें उचित रोजगार एवं उपयुक्त कार्य दिलाने में सहयोग देना। सहकारी संस्थाओं एवं उद्योग धंधों को चलाने के लिये प्रेरणा देना एवं सहयोग करना।
4. संगठन के उद्देश्यों को अग्रसर करने के लिये, समय-समय पर सभा सम्मेलन, वाद-विवाद गोष्ठी, सांस्कृतिक समारोह, प्रदर्शनी, खेलकूद, व्यायाम-योग, चल-चित्र नाटक, औद्योगिक भ्रमण, सामूहिक विवाह, चिकित्सा व स्वास्थ्य परीक्षण केन्द्र, रक्तदान आदि विविध प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करना एवं करवाना।
5. निर्धारित कार्यों एवं योजनाओं के लिये धन संग्रह करना तथा उसका विनियोग करना, चल अथवा अचल सम्पत्ति प्राप्त अथवा धारण करना। इन कार्यों के लिय आवश्यक सभा अथवा न्यास आदि स्थापित करना अथवा सम्पति सम्बन्धी क्रय-विक्रय ऋण बंधक लीज आदि के अधिकार ग्रहण करना।
6. राष्ट्रीय, सामाजिक तथा जनोन्नति के अन्य कार्यों में भाग लेना तथा सहयोग करना।
6 नीति :-
संगठन में प्रस्तुत होने वाले किसी प्रस्ताव में सामाजिक बहिष्कार की नीति को स्थान नहीं दिया जाएगा। विशेष परिस्थिति में कार्यकारी मण्डल की बैठक में उपस्थिति के 3/4 से अधिक बहुत से ही असहयोग की घोषणा की जा सकेगी।
7 परिभाषाएं :-
इस विधान में दिये गये शब्दों का अर्थ नीचे लिखी परिभाषा के अनुसार माना जाएगा -
1. ''संगठन'' शब्द से तात्पर्य -'अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी युवा संगठन' से है।
2. 'महासभा' शब्द से तात्पर्य 'अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा' से है।
3 . 'माहेश्वरी ' शब्द से तात्पर्य उन व्यक्तियों से है जो अपने को माहेश्वरी कहते हैं और जिनमें परम्परागत माहेश्वरी जाति की खांपे हैं।
4. 'कार्यकारी मंडल' शब्द का अर्थ संगठन द्वारा गठित कार्यकारी मण्डल से है।
5. 'कार्यसमिति' का अर्थ संगठन द्वारा गठित कार्यसमिति से है।
6. महासभा की कार्य समिति का अर्थ अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा द्वारा गठित कार्य समिति से है।
7. अचंल व प्रादेशिक क्षेत्रों का अर्थ अपने संगठन के लिए महासभा द्वारा निर्धारित भौगोलिक क्षेत्रों से है।
8 प्रधान कार्यालय :-
1. संगठन के कार्यकारी मण्डल व महासभा की कार्य समिति के निश्चयानुसार किसी स्थान पर प्रधान कार्यालय स्थापित होगा, जहां संगठन से सम्बन्धित समस्त कागजात एवं सामग्री रखी जायेगी, और जहां नियुक्त कर्मचारी रखे जा सकेंगे एवं आवश्यकता होने पर कार्यालय भवन भी बनाया जा सकेगा।
2. जब तक संगठन का स्थाई कार्यालय निश्चित नहीं होता तब तक महामंत्री द्वारा प्रदत्त स्थान ही संगठन का प्रधान कार्यालय होगा।
9 संगठन का स्वरूप :-
संस्था का संगठनात्मक स्वरूप निम्न प्रकार होगा -
1. कार्यकारी मण्डल
2. कार्य समिति।
3. आंचलिक, प्रादेशिक क्षेत्रीय व जिला संगठन।
4. माहेश्वरी युवाओं को प्रतिनिधित्व करने वाली किसी भी नाम से सम्बोधित स्थानीय स्थान जैसे माहेश्वरी नवयुवक मण्डल, परिषद, क्लब, सभा, संघ, संगठन आदि।
5. संगठन द्वारा स्थापित न्यास, लिमिटेड कम्पनी, सहकारी प्रतिष्ठान, समिति उपसमिति आदि।
10 सम्बद्धता के नियम :-
1. समाज की किसी भी स्थानीय युवा प्रतिनिधि संस्था को संगठान द्वारा निर्धारित सम्बद्धता फार्म भरने पर सम्बद्धता प्राप्त हो सकेगी। किसी एक स्थान पर 100 से अधिक माहेश्वरी परिवार होने पर प्रादेशिक व केन्द्रीय कार्यालय की सहमति से संगठन से सम्बन्धित एक अधिक उप संस्थाये भी हो सकती है।
2. सम्बद्धता सम्बन्धी उपनियम बनाने व शुल्क निर्धारित करने का अधिकार कार्यसमिति को होगा।
3. उन्हीं संगठन, संस्थाओं को सम्बद्धता प्रदान की जायेगी, जिनमें सदस्यता की अधिकतम आयु 40 वर्ष या उससे कम होगी।
11 सदस्यता :-
1. सामान्य सदस्य - माहेश्वरी समाज के सर्व सामान्य युवक-युवती जिनकी आयु 18 वर्ष से 40 वर्ष के बीच में हो संगठन सामान्य सदस्य माने जाएंगे।
2. विशेष सदस्य - 18 वर्ष से 40 वर्ष की आयु समूह वाले युवक-युवती जो संगठन अथवा उसके अन्तर्गत या सम्बन्धित किसी स्थानीय संस्था को नियमानुसार शुल्क प्रदान करें। वे संगठन के विशेष सदस्य माने जायेंगे।
3. सहयोगी सदस्य - संगठन को एक सौ रूपये प्रति सत्र देने वाले स्वजन सहयोगी सदस्य माने जायेंगे।
12 सदस्यता के उपनियम :-
1. सामान्यतः संगठन के सभी सदस्यों के अधिकार समान होंगे। परन्तु चुनावों अथवा प्रबन्धक मामलों में मतदान का अधिकार केवल कार्यकारी मण्डल के सदस्यों को ही होगा।
2. सदस्यता सम्बन्धी कोई श्रेणी बढ़ाने अथवा इस सम्बन्ध में नियम-उपनियम बनाने या शुल्क निर्धारण परिवर्तन परिवर्धन करने का अधिकार कार्यकारी मण्डल को ही होगा।
13 स्थानीय सभाएं :-
1. जिस ग्राम, नगर या समीपवर्ती गांवों में माहेश्वरी परिवार निवास करते हों, वहां नियमावली की धारा-9 उपधारा ''घ'' के अनुसार स्थानीय युवा संगठन स्थापित हो सकेंगे।
2. संगठन के सिद्धान्त उद्देश्य व नीति को ध्यान में रख कर ही स्थानीय तथा सम्बन्धित सभाएं अपना कार्य संचालित करेगी।
3. प्रत्येक स्थानीय संस्था का कर्तव्य होगा कि अपना विधान एंव अपनी गतिविधियों को वार्षिक लेखा-जोखा वर्ष समाप्ति के 3 माह के भीतर प्रधान कार्यालय को सीधा अथवा अपने यहां के प्रादेशिक संगठन के माध्यम से प्रेरित करें।
14 तहसील, जिला प्रादेशिक एवं आंचलिक संगठन :-
1. स्थानीय सम्बन्ध संस्थाओं के प्रतिनिधियों द्वारा आवश्यकतानुसार प्रादेशिक व केन्द्रयी संगठन की सहमति से, जिला अथवा श्रेत्रीय संगठनों का गठन हो सकेगा।
2. जिला अथ्वा क्षेत्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा प्रादेशिक संगठनों का गठन होगा।
3. प्रादेशिक संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा आंचलिक संगठनों का गठन होगा।
4. प्रादेशिक अथवा आंचलिक संगठन, केन्द्रीय संगठन से सीधे सम्बन्धित होंगे।
5. स्थानीय तथा सम्बद्ध संस्थाये तहसील, जिला, क्षेत्रीय, प्रदेश एवं आंचलिक स्तर के संगठनों की भी इकाई व शाखा मानी जायेगी, परन्तु अनुशासन के मामले में केन्द्रीय संगठन ही सर्वोपरि होगा।
6. युवा संगठन, अपने प्रादेशिक संगठन व अन्य संगठनात्मक अवयवों के लिये आवश्यकतानुसार विधान का प्रारूप बना सकेगा।
15 प्रादेशिक एवं आंचलिक संगठन :-
संगठन के कार्य की सुगमता हेतु भौगोलिक रूप से कार्य क्षेत्र का चार अंचलों में विभाजन होगा यथा पूर्वांचल, उत्तरांचल, पश्चिमांचल, दक्षिणांचल। इस चार अंचलों का कार्य सुविधा की दृष्टि से 22 प्रदेशों में विभाजित होगा, प्रत्येक प्रदेश में युवा संगठन का प्रादेशिक संगठन द्वारा 14 की उपधारा 'ख' के अन्तर्गत गठित होगा। कार्यकारी मण्डल का गठन इन्हीं प्रादेशिक संगठनों द्वारा निर्वांचित प्रतिनिधियों द्वारा होगा।
कार्यकारी मण्डल में विविध अचंल व प्रदेशों का प्रतिनिधित्व निम्न प्रकार होगा -
पूर्वांचल (45)
कलकत्ता - 15
प. बंगाल - 6
बिहार - 7
उड़ीसा - 5
आसाम एवं निकटवती क्षेत्र - 7
नेपाल, सिक्क्मि, मेघालय आदि - 5
उत्तरांचल (45)
पूर्वी उत्तरप्रदेश - 7
मध्य उत्तरप्रदेश - 11
पश्चिमी उत्तरप्रदेश - 14
दिल्ली - 7
पंजाब-2, हरियाणा-2,
कश्मीर-1, हिमाचल-1 - 6
पश्चिमांचल (65)
राजस्थान - 27
गुजरात - 10
पूर्वी मध्यप्रदेश - 8
मध्य मध्यप्रदेश - 12
पश्चिम मध्यप्रदेश - 8
दक्षिणांचल (65)
मुम्बई - 8
महाराष्ट्र - 20
विदर्भ - 14
आन्ध्र - 12
तमिलनाडू-4, केरल-1 - 5
कर्नाटक-5, गोवा-1 - 6
कुल प्रतिनिधि संख्या - 220
अंचल एवं प्रदेश का पुनः निर्धारण एवं प्रतिनिधि संखया घटाने-बढ़ाने का अधिकार कार्यकारी मण्डल को होगा। विदेशों में अस्थाई निवास करने वाले माहेश्वरी अपने से सम्बन्धित प्रादेशिक संगठन के सदस्य बन सकेंगे।
कार्यकारी मण्डल के सदस्य को स्थानीय सम्बद्ध संगठन का सदस्य होना अनिवार्य होगा। ये अपनी तहसील तथा जिला सभाओं की कार्यकारिणी के पदेन सदस्य होंगे। इसके ऊपर के संगठन की कार्यकारिणी के निश्चयानुसार उस संगठन की प्रबन्ध समिति में विशेष आमन्त्रित सदस्य होंगे।
16 मान्यता समाप्त करने का अधिकार :-
निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने की अवस्था में सम्बन्धित संगठन के असन्तोषजनक स्पष्टीकरण होने पर कार्यकारी मण्डल को अधिकार होगा कि वह उस संगठन/संस्था की मान्यता रद्द कर दे अथवा भंग कर दे।
17 तदर्थ समिति का गठन :-
किसी संगठन या सभा की मान्यता समाप्त होने अथवा त्यागपत्र की अवस्था में कार्यसमिति को अधिकार होगा कि वह नये निर्वाचन का प्रबन्ध करे और आवश्यकता अनुभव हो तो निर्वाचन के समय तक कार्य संचालन के लिए तदर्थ समिति का गठन या मनोनयन करे। जहां प्रादेशिक संगठन स्थापित न हो वहां भी उनकी स्थापना तक तदर्थ समिति नियुक्त करने का अधिकार कार्य समिति को होगा। इस प्रकार से स्थापित तदर्थ समितियों को भी गठित संगठन के अनुसार पूर्ण अधिकार प्राप्त होंगे।
18 कार्यकारी मण्डल :-
1. युवा संगठन के कार्य संचालन के लिए अखिल भारतवर्षीय कार्यकारी मण्डल होगा, प्रत्येक प्रादेशिक संगठन की प्रबन्ध समिति या तदर्थ समिति को अधिकार होगा कि वह सत्र समाप्ति के तीन माह पूर्व अपने प्रदेश के प्रतिनिधियों के नाम केन्द्रीय कार्यालय को भेज देवे। प्रतिनिधियों का चुनाव करते समय, प्रादेशिक संगठन ऐसे जिले या जिला समूहों के जहां माहेश्वरी परिवार पर्याप्त संखया में रहते हैं प्रतिनिधित्व का ध्यान रखेंगे, इन प्रतिनिधियों को संगठन का विशेष सदस्य होना आवश्यक होगा। प्रादेशिक युवा संगठन महासभा के प्रादेशिक संगठनों की देख-रेख में प्रतिनिधियों का चयन करेंगे। जिन प्रदेशों की ओर से निर्धारित समय में नाम प्राप्त न होंगे और तदर्थ समिति का गठन सम्भव नहीं होगा, उन प्रदेद्गाों के प्रतिनिधियों का चुनाव कार्यसमिति द्वारा किया जायेगा। आवश्यकतानुसार कार्यसमिति चुनाव के लिए पर्यवेक्षक की नियुक्ति कर सकेगी।
कार्यकारी मण्डल के सदस्य के लिए यह आवश्यक होगा कि वह न्यूनतम निर्धारित कार्य पूरा करने की जिम्मेदारी लें।
2. धारा 15 के अनुसार निर्देशित कार्यकारी मण्डल के निर्वाचित सदस्यों क अतिरिक्त निम्नांकित बन्धु भी कार्यकारी मण्डल के सदस्य होंगे -
संगठन के सभी पदाधिकारी।
संगठन के सभी भूतपूर्व अध्यक्ष, महामंत्री एवं निवर्तमान सत्र के सभी पदाधिकारी।
प्रादेशिक संगठनों के अध्यक्ष व मंत्री अथवा तदर्थ समिति के संयोजक।
संगठन के अध्यक्ष जी द्वारा मनोनीत 10 सदस्य।
40 वर्ष से कम उम्र के सभी माहेश्वरी विधायक, संसद सदस्य।
40 वर्ष से कम उम्र के सभी माहेश्वरी आई.ए.एस., आई.पी.एस. एवं समकक्ष प्रशासकीय अधिकारी।
40 वर्ष से कम उम्र के सभी माहेश्वरी राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त माहेश्वरी युवाजन।
3. कार्यकारी मण्डल का दायित्व एवं बैठके :-
अ- संगठन के उद्देश्यों को अग्रसर करने एंव पारित प्रस्तावों के क्रियान्वन का दायित्व कार्यकारी मण्डल पर होगा। कार्यकारी मण्डल को इन कार्यों के सम्बन्ध में विविध योजनाये निर्धारित करने, नियम-उपनियम बनाने एवं आवश्यकतानुसार संगठन अथवा समिति-उपसमिति की स्थापना करने का अधिकार होगा।
ब- सत्र के मध्य में किसी पदाधिकारी या कार्य समिति के सदस्य का स्थान रिक्त होने पर कार्य समिति को अधिकार होगा कि वह रिक्त पद की पूर्ति सम्बन्धित क्षेत्र से कर लें। महामंत्री एवं अर्थमंत्री के उपचुनाव में सम्बन्धित क्षेत्र की बाध्यता नहीं होगी।
स- कार्यकारी मण्डल के जो सदस्य बिना सूचना दिए लगातार दो बैठकों में अनुपस्थित रहेंगे, इनके स्थान कार्य समिति द्वारा रिक्त घोषित किये जा सकेंगे।
द- निधन, अनुपस्थिति अथवा त्याग पत्र के कारण कार्यकारी मण्डल के सदस्यों के जो स्थान रिक्त होंगे, उनके स्थान पर कार्य समिति सम्बन्धित प्रादेशिक संगठन के माध्यम से नये सदस्य मनोनीत कर सकेगी।
प- कार्यकारी मण्डल की बैठकें कार्य समिति की राय पर अध्यक्ष जी की सहमति से महामंत्री जी द्वारा आवश्यकतानुसार बुलाई जायेगी। विशेष परिस्थितियों में अध्यक्ष स्वयं बैठक बुला सकेंगे। 1 वर्ष में एक बैठक का होना अनिवार्य होगा। बैठके के लिए कोरम 30 सदस्यों का होगा जिनमें पदाधिकारी भी सम्मिलित है। बैठक की सूचना 30 दिन पूर्व डाक द्वारा प्रमाण पत्र लेकर प्रसारित की जायेगी, जिसमें विचारार्थ विषयों की सूची अंकित होगी, परन्तु अध्यक्ष जी की अनुमति से अन्य प्रश्नों पर भी विचार हो सकेगा।फ- यदि कार्यकारी मण्डल के कम से कम 30 सदस्य किसी विद्गोष कार्य के लिए मण्डल की बैठक बुलाने हेतु अध्यक्ष जी को लिखित आवेदन स्थान के निमंत्रण सहित देंगे तो अध्यक्ष जी सूचना मिलने के दो मास के भीतर आवेदन में उल्लेखित विषयों पर विचार करने के लिए कार्यकारी मण्डल की बैठक बुलवायेंगे। यदि अध्यक्ष ने उक्त आवेदन पर बैठक नहीं बुलाई तो आवेदनकर्ता सदस्यों को अधिकार होगा कि वे आवेदन की तिथि के 60 दिन के बाद ९० दिन के अन्दर 30 दिन की सूचना डाक से प्रमाण पत्र लेकर स्वयं कार्यकारी मण्डल की बैठक आयोजित कर सकेंगे। इस प्रकार आयोजित मण्डल की विशेष बैठक में केवल उल्लेखित विषयों पर ही विचार एवं निर्णय किया जा सकेगा।
र- कार्यकारी मण्डल के सदस्यों को प्रति सत्र 100 रू. संगठन को देना अनिवार्य होगा।
19 कार्य समिति एवं पदाधिकारियों का चुनाव :-
1. संगठन के कार्य को सुगमतापूर्वक चलाने तथा उपस्थित प्रश्नों एवं समस्याओं का शीघ्र निर्णय करने के लिये कार्यकारी मण्डल के सदस्यों में से कार्य समिति का गठन किया जायेगा। पदाधिकारियों को मिलाकर कार्य समिति के सदस्यों की कुल संखया अधिकतम 45 होगी। इसका गठन निम्न प्रकार से होगा।
क- धारा 20 के अनुसार पदाधिकारी 11
ख- प्रदेशों से निर्वाचित प्रतिनिधि 28
ग- अध्यक्ष द्वारा मनोनीत 3
घ- निर्वतमान अध्यक्ष एवं महामंत्री 2
ड- संगठन के ''मुख पत्र'' के संचालक 1
कुल 45
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उपरोक्त निर्वाचित 23 सदस्य अपने क्षेत्र का कार्य समिति में प्रतिनिधित्व करेंगे। कार्य समिति के इन सदस्यों का निर्वाचन सम्बन्धित प्रदेश के कार्यकारी मण्डल के सदस्य करेंगे। आवश्यकता हुई तो इसके लिए गुप्त मतदान प्रणाली भी अपनाई जायेगी।
20. पदाधिकारी :-
संगठन के निम्नलिखित पदाधिकारी होंगे -
सभापति 1
उपसभापति 4
महामंत्री 1
अर्थमंत्री 1
संयुक्त मंत्री 4
कुल 11
21 अध्यक्ष का निर्वाचन :-
महासभा कार्य समिति इस विधान की धारा 19 की उपधारा 2 के अनुसार निर्वाचित सदस्य एवं पदेन सदस्य अपने में से अधिकतम 3 सदस्यों का चयन कर उनके नामों का पैनल महासभा को प्रेषित करेंगे। महासभा कार्यसमिति इनमें से किसी एक को अध्यक्ष मनोनीत/घोषित करेंगी। इस घोषणा के बाद नये कार्यकारी मण्डल की प्रथम बैठक में अध्यक्ष को स्वतः कार्य संचालन के सम्पूर्ण अधिकार प्राप्त हो जायेगे।
22 पदाधिकारियों का चयन :-
क- नव निर्वाचित अध्यक्ष की अनुशंषा पर ''महासभा कार्य समिति'', पदाधिकारियों का चयन/निर्वाचन कार्य समिति व कार्यकारी मण्डल के सदस्यों में से करेगी। कम से कम 7 पदाधिकारी निर्वाचित, 28 कार्यसमिति सदस्यों में से लिया जाना आवश्यक होगा। 4 उपाध्यक्ष एवं 4 संयुक्त मंत्रियों का अलग-अलग अंचलों से होना अनिवार्य है।
ख- पदाधिकारियों के निर्वाचन से जो कार्य समिति या कार्यकारी मण्डल के स्थान रिक्त होंगे, उसकी पूर्ति सम्बन्धित प्रादेशिक संगठन की कार्यसमिति करेगी।
23 पदाधिकारियों के उत्तरदायित्व एवं अधिकारी :-
1. अध्यक्ष -
अध्यक्ष जी अधिवेशन, सम्मेलन, कार्यकारी मण्डल तथा कार्य समिति की बैठकों की अध्यक्षता करेंगे और संगठन के समस्त कार्य संचालन के लिए उत्तरदायी होंगे। सभी पदाधिकारियों एवं कार्य समिति के सदस्यों के लिए अध्यक्ष जी विधानानुसार कार्य वितरण कर सकेंगे।
2. उपाध्यक्ष -
अध्यक्ष जी की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष जी सभा की अध्यक्षता करेंगे और संगठन के कार्य संचालन में अध्यक्ष जी को वांछित सहयोग देंगे तथा अपने अंचल के कार्य को पूरा करने की व्यवस्था करेंगे।
३. महामंत्री -
संगठन कार्यालय के संचालन का उत्तरदायित्व महामंत्री के ऊपर होगा। महामंत्री-सम्मेलन-अधिवेशन कार्यसमिति एवं कार्यकारी मण्डल की बैठकों की कार्यवाही रखेंगे। कर्मचारियों की नियुक्ति करेंगे। कार्यकारी मण्डल एवं कार्य समिति के निश्चियानुसार संगठन का कार्य करेंगे। संगठन की ओर से पत्र-व्यवहार तथा अन्य आवश्यक कार्य करेंगे।
4. संयुक्त मंत्री -
संगठन को सुदृढ़ करने एवं महामंत्री को उत्तर दायित्व के निर्वाह में सक्रिय सहयोग देंगे। अध्यक्ष द्वारा कार्य विभाजन द्वारा सौंपे हुए कार्यों को सम्पन्न करेंगे तथ अपने अंचल के कार्य को पूरा करवाने की जिम्मेदारी वहन करेंगे।
5. अर्थ मंत्री -
कार्यकारी मण्डल द्वारा स्वीकृत बजट के अनुसार अर्थ संग्रह की योजना करेंगे, विभिन्न विभागों का हिसाब तैयार करवायेंगे और उसे ऑडिटर से ऑडिट करवा कर कार्य समिति एवं कार्यकारी मण्डल के समक्ष स्वीकृति के लिये प्रस्तुत करेंगे।
कार्य समिति के सदस्यों का दायित्व :
1. महासभा व संगठन के आदेशात्मक एवं नीति नियम प्रस्तावों का पालन करना सभी सदस्यों का नैतिक दायित्व होगा।
2. संगठन के खर्च क लिए प्रति सत्र 250 रू. देना अनिवार्य होगा।
3. सदस्यों को कार्य विभाजन में प्राप्त कार्य की जिम्मेदारी वहन करनी आवश्यक होगी।
4. कार्य समिति सदस्य जो बिना सूचना दिए बैठक में अनुपस्थित रहेंगे उन्हें कारण बताओं नोटिस दिया जायेगा तथा संतोषजनक प्रति उत्तर न मिलने की स्थिति में कार्य समिति को उस सदस्य को सदस्यता से प्रथक करने का अधिकार होगा।
24 कार्य समिति की बैठक एवं कार्यकाल :
क- कार्य समिति को बैठक अध्यक्ष जी की सहमति से महामंत्री जी द्वारा आवश्यकतानुसार बुलाई जायेगी। विशेष परिस्थिति में अध्यक्ष जी स्वयं बैठक बुला सकेंगे। एक वर्ष में दो बैठकों का होना आवश्यक होगा। बैठक के लिए कोरम 10सदस्यों का होगा,जिनमें पदाधिकारियों के अतिरिक्त कम से कम पांच सदस्य अवश्य होंगे। बैठक की सूचना 21 दिन पूर्व डाक द्वारा प्रमाण पत्र लेकर प्रसारित की जायेगी, जिनमें विचारार्थ विषयों की सूची अंकित होगी, अध्यक्ष जी की अनुमति से बैठक में अन्य प्रश्नों पर भी विचार हो सकेगा।
ख- कार्यकारी मण्डल के सामान्यतः सब अधिकारी कार्य समिति को प्राप्त होंगे।
ग- साधारणतया कार्य समिति व कार्यकारी मण्डल का कार्य काल 3 वर्ष अथवा महासभा के कार्यकारी मण्डल के सत्र के अनुरूप होगा।
25 संगठन का कोष, आय व्यय पत्रक तथा हिसाब :
1. संगठन के कार्य को सुचारू रूप से चलाने हेतु संगठन खर्चें के लिए कोष का निर्माण कर सकेगा। कोष को कार्य समिति द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार बैंक में रखा जायेगा। बैंक में अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी युवा संगठन के नाम से खाता खोला जायेगा। जिस पर निम्नलिखित पदाधिकारियों के हस्ताक्षर होंगे -
1. अध्यक्ष। 2. महामंत्री। 3 अथमंत्री। इनमें से किन्हीं दो के हस्ताक्षर से बैंक का खाता चलाया जा सकेगा। स्थान विशेष के बैक खाते की जिम्मेदारी वहा निवास करने वाले पदाधिकारी की होगी। संगठन के हिसाब के परीक्षण के लिए कार्य समिति ऑडिटर की नियुक्ति करेगा।
2. स्थायी कोष के लिए प्राप्त धन स्थायी निधि के तौर पर कार्यकारी मण्डल के निश्चियानुसार जमा किया जायेगा और उसकी ब्याज की आय ही खर्च की जा सकेगी। कार्यकारी मण्डल की अनुमति से ही विशेष परिस्थिति में स्थायी कोष में जमा राशी खर्च की जा सकेगी।
3. कार्यकारी मण्डल की बैठक में वार्षिक अनुमानित आय व्यय पत्रक एवं पूर्व वर्ष का ऑडिट किया हुआ हिसाब ६ महीने के अन्दर प्रस्तुत किया जायेगा। संगठन के कोई भी पदाधिकारी 500 रू. से अधिक राशी कार्य समिति की पूर्व स्वीकृति के बिना अपने पास नगद न रख सकेंगे। संगठन के रोकड़ खाते, चैक बुक एवं रसीद बुके सम्भालकर रखने व उनमें आवद्गयक इन्द्राज करते रहने की संयुक्त जिम्मेदारी अर्थ मंत्री व महामंत्री की होगी।
अनुदान :
कार्य समिति प्रादेशिक सभाओं को वार्षिक आय में से यथा आवश्यकतानुसार अनुदान दे सकेगी अथवा प्रादेशिक सभा की आय का निर्धारित अंश केन्द्रीय खर्च के लिए प्राप्त करने की व्यवस्था अपना सकेगी। संगठन अन्य संगठनात्मक अवयवों से समान उद्देश्य अनुकूल कार्यों के लिए आवश्यकतानुसार अनुदान दे/ले सकेगी।
26 मतदान-विधान संशोधन :-
क- कार्यकारी मण्डल एवं कार्य समिति के निर्णय सर्वसम्मत या बहुमत द्वारा होगें। सामान्यतः मतदान हाथ उठाकर किया जायेगा। उपस्थित सदस्यों के 30 प्रतिशत की मांग पर गुप्त मतदान प्रणाली अपनायी जायेगी। सामान मतों की अवस्था में अध्यक्ष जी को अपना विशेष मत देने का अधिकार होगा। संगठन द्वारा पारित महत्वपूर्ण प्रस्तावों की पुष्टि महासभा द्वारा कराना अनिवार्य होगा।
ख- विधान संशोधन
विधान में संशोधन करने का अधिकार कार्यकारी मण्डल को होगा। उपस्थित सदस्यों के 60 प्रतिशत से ही विधान में सशोधन किया जा सकेगा। उपरोक्त बैठक में कार्यकारी मण्डल के 30 प्रतिशत सदस्यों की उपस्थिति आवश्यक होगी। 30 प्रतिशत की गिनती करते समय अनुपस्थित सदस्यों की संशोधन हेतु प्राप्त लिखित स्वीकृति भी गिनी जायेगी।
ग- मतदान एवं निर्वाचन में भाग लेने का अधिकार केवल उन्हीं सदस्यों को होगा जिनका सदस्यता शुल्क जमा होगा।
27 उपनियम :-
कार्यकारी मण्डल को अधिकार होगा कि वह आवश्यकतानुसार विधान के पूरक उपनियम बनायें।
1. कार्यकारी मण्डल को अधिकार होगा कि वह आवश्यकतानुसार विधान के पूरक उपनियम बनायें।
2. उप समितियों के कार्य के सम्बन्ध में कार्य समिति नियम बना सकेगी।
3. चुनाव सम्बन्धी नियम बनाने का अधिकार कार्य समिति को होगा।
4. यह संशोधित विधान 21 जनवरी 1959 से लागू माना जायेगा। चुनाव सम्बन्धी नियम आगामी सत्र के समय लागू होंगे।
5. संगठन को अपनी हर बैठक की रिपोर्ट महासभा को प्रेषित करनी होगी।
6. महासभा कार्यकारी मण्डल हेतु संगठन के प्रतिनिधियों का चयन कार्यसमिति द्वारा किया जायेगा।
28 स्थगित बैठक :-
कार्यकारी मण्डल, कार्य समिति आदि की निर्धारित बैठक में निश्चित समय पर यदि कोरम पूरा न हुआ तो वह सभा स्थगित कर दी जायेगी। स्थगित बैठक पुनः बुलाने की सूचना सब सदस्यों को नियमानुसार दी जायेगी। स्थगित बैठक पुनः होने पर उसके लिये कोरम का प्रतिबन्ध न होगा। उपस्थित सदस्यों की सर्व-सम्मति पर स्थगित बैठक उसी दिन ही पुनः हो सकेगी। किन्तु इससे महत्वपूर्ण विषय पर विचार न हो सकेगा।
29 आर्थिक वर्ष :-
संगठन का आर्थिक वर्ष एक अप्रेल से 31 मार्च तक माना जायेगा।
30 पारिश्रमिक :-
संगठन के कार्य के लिए विशेष सेवाये प्राप्त होने पर प्रधान कार्यालय से पूर्व अनुमति लिए जाने पर किसी कार्यकर्ता को पारिश्रमिक दिया जा सकेगा। संगठन के कार्य से जो पदाधिकारी या कार्यकारी मण्डल द्वारा गठित समितियों के सदस्य भ्रमण करेंगे, उन्हें वास्तविक मार्ग व्यय दिया जा सकेगा।
31 अनुशासनात्मक कार्यवाही :-
संगठन के किसी उद्देश्य, प्रस्ताव अथवा नियम का उल्लंघन एवं अवहेलना करने की अवस्था में कार्य समिति द्वारा किसी कार्य समिति एवं कार्यकारी मण्डल के सदस्य की सदस्यता स्थगित अथवा निलम्बित की जा सकेगी। इस प्रकार की कार्यवाही के पूर्व उस सदस्य का स्पष्टीकरण मांगा जायेगा। सम्बन्धित सदस्य चाहे तो वह कार्य समिति के निर्णय के विषय में कार्यकारी मण्डल को अपील कर सकेगा। उस स्थिति में कार्यकारी मण्डल का निर्णय अन्तिम होगा।
32 कानूनी कार्यवाही :-
संगठन के कोष सम्पत्ति अथवा हिसाब-किताब के सम्बन्ध में आवश्यकतानुसार कानूनी कार्यवाही महामंत्री के नाम से की जाएगी और इस सम्बन्ध में उन्हें योग्य अधिकार प्राप्त होंगे।
33 मध्यस्थ की नियुक्ति :-
कोई विवाद उपस्थित होने पर आवश्यक समझे तो कार्यसमिति निर्णय के लिये मध्यस्थ की नियुक्ति कर सकेगी। सम्बद्धता प्राप्त किसी संस्था या सदस्य के लिए किसी प्रकार की कानूनी कार्यवाही के पूर्व इस नियम का पालन अनिवार्य होगा।
34 भाषा :-
संगठन की भाषा देवनागरी लिपि में हिन्दी होगी।
35 विसर्जन :-
संगठन का विसर्जन करने के लिये यदि कभी कोई प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ तो उस पर विचार करने के लिये कार्यकारी मण्डल की विशेष बैठक महासभा की अनुमति से बुलाई जायेगी। यदि उपस्थित सदस्यों के 75 प्रतिशत बहुमत द्वारा विसर्जन का प्रस्ताव स्वीकार किया गया तो उसे क्रियान्वित किया जायेगा।
विसर्जन की दशा में संगठन की समस्त सम्पत्ति अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा को सौंप दी जाएगी। किसी भी स्थिति में संगठन की सम्पत्ति का वितरण व्यक्तिगत रूप से नहीं किया जायेगा।
देश भर के सभी युवा संगठनों से निम्न कार्यक्रम हेतु निवेदन
1. जनगणना कराना :-
जिससे कि (अ) विवाह योग्य लड़के-लड कियों की सूची बन सकें, उसे प्रकाशित कराना।
(ब) सहायता योग्य युवाओं, असहाय बहनों को सम्बन्धित इष्टों से योगदान दिलाने हेतु प्रयत्न करना।
2. विशेष योग्यता प्राप्त युवाओं का अभिनन्दन करना।
3. समाज के हर सदस्य का रक्त वर्ग की जांच कर उनका विवरण रखना।
4. अपने हर कार्यक्रम की जानकारी ''युवा माहेश्वरी '' एवं संगठन के प्रधान कार्यालय को भेजना।
5. अपना संविधान, पदाधिकारियों के पते सहित सूची एवं वार्षिक रिपोर्ट ''युवा माहेश्वरी '' एवं संगठन के प्रधान कार्यालय को भेजना।
6. प्राप्त ''युवा माहेश्वरी '' अपने सभी सदस्यों को पढ ने हेतु उपलब्ध कराना।
(अ) वे स्थानीय संगठन जहां 100 से कम माहेश्वरी परिवार निवास करते हो या संगठन की स्थापना को 3 वर्ष से कम हुआ हो।
(1) स्थानीय स्तर पर खेलकूद, वाद-विवाद, निबंध एवं अन्य स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना।
(2) बुक बैंक एवं स्पोर्टस क्लब की स्थापना करना।
(ब) वे स्थानीय संगठन जहां 100 से 300 माहेश्वरी परिवार निवास करते हो या संगठन की स्थापना को 3 -10 वर्ष हुए हो।
(1) जिला स्तरीय खेलकूद, वाद-विवाद, निबंध एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना।
(2) आस पास के स्थानों पर जहां माहेश्वरी परिवार निवास करते हो, पर युवा संगठन नही हो, जाकर गठन कराना।
(3) वर्तमान में सामूहिक विवाह आयोजित होते हो तो सहयोग प्रदान करना, न होते हो तो आयोजन का प्रयास करना, या जहां होते हो वहां हेतु सम्बन्धित पक्षों को भेजने का प्रयास करना।
(4) मेडीकल चेकअप शिविर आयोजित करना।
(5) स्थानीय स्तर पर रोजगार ब्यूरो की स्थापना करना।
(6) परिचय सम्मेलन कराना।
(7) कैश-कार्ड होल्डर योजना चालू करवाना।
(स) वे स्थानीय संगठन जहां 300 से अधिक माहेश्वरी परिवार निवास करते हो या संगठन की स्थापना को 10 वर्ष से ज्यादा हुए हो।
(1) क्षेत्रीय, प्रादेशिक एवं आंचलिक स्तर पर खेलकूद, वाद-विवाद, निबंध एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना।
(2) सामूहिक विवाह का आयोजन कराना।
(3) गेरेंटर फोरम की स्थापना करना।
(4) क्षेत्रीय रोजगार ब्यूरों की स्थापना कराना।
(5) छात्रावास की स्थापना करना।
(6) को-ऑपरेटिव स्टोर्स, हाउसिंग सोसायटी एवं बैंक की स्थापना करना