अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा

संविधान
कार्यकारी मण्डल की दिनांक 8 जनवरी 2005 की सूरत बैठक में स्वीकृत

1 नाम :-
इस संस्था का नाम ''अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा'' होगा।

2 कार्यक्षेत्र :-
भारतवर्ष सहित अन्य ऐसे सभी देश जहा माहेश्वरी निवास करते हैं,महासभा .......का कार्यक्षेत्र होगा।

3 उद्देश्य एवं उद्देश्य की पूर्ति के मार्ग :-
विश्व के समस्त निवासियों की उन्नति एवं प्रगति के व्यापक दृष्टिकोण के साथ माहेद्गवरी समाज की समयानुकूल सर्वांगीण उन्नति करना जिससे माहेश्वरी समाज विद्गव का प्रगतिशील घटक बना रहें। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु निम्नलिखित एवं इससे सम्बन्धित कार्य करना -
1. समाज के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, नैतिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, व्यावसायिक, द्गौक्षणिक,शारीरिक उन्नति के लिए प्रयत्न करना। ऐसी उन्नति को साध्य करने के लिए आवश्यक संस्थाओं की स्थापना करना एवं स्थापित संस्थाओं को सहयोग देना एवं सहयोग लेना।

2. पत्र-पत्रिकाएं, स्मारिकाएं एवं प्रचार साहित्य का प्रकाशन एवं वितरण करना।

3. रोजगार, व्यवसाय आदि के इच्छुक व्यक्तियों को मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान करना। इस हेतु शिक्षण, प्रशिक्षण, भ्रमण, प्रदर्शन, सेमिनार आदि का आयोजन करना अथवा करवाना। सहकारी एवं सरकारी संस्थाओं के माध्यम से व्यवसाय एवं आवासीय सुविधाएं बढ़ाना।

4. समाज के अभावग्रस्त लोगों की सहायता करना, छात्रवृत्ति देना एवं दिलवाने की व्यवस्था करना। नैसर्गिक आपत्ति जैसे - बाढ , अतिवृष्टि, अनावृष्टि, भूकम्प, अग्निकोप आदि से ग्रस्त बंधुओं को सहयोग देना। ब्याज रहित अथवा कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराना।

5. समाज के असहाय, बेरोजगार, अपंग, अस्वस्थ, निराश्रित एवं जरूरतमंद बालकों, बालिकाओं, महिलाओं एवं पुरूषों को सहयोग देना, इस हेतु विभिन्न ट्रस्ट, संस्थाएं अथवा अवयव स्थापित करना अथवा करवाना।

6. समाज में व्यापत कुरीतियां व समस्याओं को दूर कर स्वस्थ परम्पराओं के विकास का मार्ग प्रद्गास्त करना।

7. महासभा द्वारा स्थापित व संचालित अवयवों द्वारा यथा सम्भव अन्य देशवासियों की सेवा करना।

8. जिन संस्थाओं द्वारा समाज के लोगों का हित होता हो, उनको सहयोग देना, ऐसी संस्थाओं का संचालन करना एवं राष्ट्रीय, सामाजिक व जन कल्याण के अन्य कार्यों में भाग लेना तथा सहयोग करना।

9. वर-वधु परिचय सम्मेलन, सामूहिक विवाह, सहकारी विवाह आदि स्थानीय अथवा प्रादेशिक संस्थाओं द्वारा आयोजित करवाना। विवाह सहयोग केन्द्र स्थापित करने की प्रेरणा देना।

10. महासभा के उद्देश्यों को अग्रसर करने के लिए सभा, सम्मेलन, गोष्ठी, परिचर्चा, समारोह, प्रतियोगिता, प्रदर्शनी , खेल-कूद, व्यायाम, योगा, चलचित्र, नाटक आदि विविध कार्यक्रम आयोजित करना अथवा कराना।

11. सहकारी, औद्योगिक एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को स्थापित एवं संचालित करने की प्रेरणा देना व उनमें सहयोग करना। इस हेतु अलग संस्थाएं या ट्रस्ट स्थापित करना अथवा कराना और उनके द्वारा समाज एवं देशवासियों की प्रगति में सहयोगी बनना।

12. तकनीकी एवं उच्च शिक्षा हेतु छात्रों को मार्गदर्शन एवं सहयोग देना। इस हेतु ट्रस्ट एवं अन्य संस्थाएं स्थापित करना अथवा कराना।

13. समाज के एवं महासभा के इतिहास के साथ समाज की उच्च गुणवत्ता को प्रदर्शित करने वाला साहित्य प्रकाशित करना, समाज के विशिष्ट गुणों के बारे में अनुसंधान करना, करवाना एवं उसका प्रचार करना।

14. आतंकवाद, प्रादेशिकवाद, भाषावाद आदि से समाज संरक्षण का प्रयास करना।

15. बालक-बालिकाओं व वयस्कों को सुसंस्कारित करने हेतु संस्कार शिविर आदि आयोजित करना एवं साहित्य सृजन करना।

16. निर्धारित कार्यों एवं योजनाओं के लिए धनसंग्रह करना, आवश्यतानुसार ब्याज सहित अथवा ब्याज रहित ऋण लेना। चल अथवा अचल सम्पत्ति प्राप्त करना व धारण करना। सम्पत्ति सम्बन्धी क्रय, विक्रय, ऋण, बंधक, लीज आदि के अधिकार ग्रहण करना एवं तत्संबंधी नियम बनाना।

17. अन्य ऐसे कार्य करना जिससे समाज की उन्नति हो।

4 परिभाषाएं :-
इस विधान में उल्लेखित विशिष्ट शब्दों का अर्थ निम्नानुसार समझा जाएगा -
1. 'महासभा' शब्द से तात्पर्य अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा से है।

2. 'माहेश्वरी' शब्द से तात्पर्य उन व्यक्तियों से है जो स्वयं को माहेश्वरी कहते हैं, जिन्हें समाज माहेश्वरी मानता है तथा जिनकी खाँप माहेश्वरी जाति की खाँपों में से है।

3. 'समाज' से तात्पय 'माहेश्वरी समाज' से है।

4. 'कार्यकारी मंडल' से तात्पर्य महासभा द्वारा विधिवत्‌ गठित कार्यकारी मण्डल से है।

5. 'कार्यसमिति' से तात्पर्य महासभा द्वारा विधिवत्‌ गठित कार्यसमिति से है।

6. 'अचंल' से तात्पर्य महासभा द्वारा निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र से है।

7. 'प्रादेशिक सभा' से तात्पर्य महासभा द्वारा निर्धारित प्रादेशिक क्षेत्र की सभाओं से है।

8. 'जिला सभा' से तात्पर्य निर्धारित जिला क्षेत्रों की सभाओं से है।

9. 'तहसील सभा' से तात्पर्य निर्धारित तहसील क्षेत्रों की सभाओं से है।

10. 'ग्राम/नगर सभा' से तात्पर्य ग्राम/नगर स्तर की सभाओं से है।

11.'युवा संगठन' से तात्पर्य महासभा द्वारा स्थापित अ.भा. माहेश्वरी युवा संगठन से है।

12. 'महिला संगठन' से तात्पर्य महासभा द्वारा स्थापित अ.भा. माहेश्वरी महिला संगठन से है।

13.'प्रोफेशनल सेल' से तात्पर्य अ.भा. माहेश्वरी महासभा द्वारा गठित प्रोफेशनल प्रकोष्ठ से है।

14. सत्र का तात्पर्य कार्यकाल से है।

15. महासभा अवयव से तात्पर्य उन समितियों एवं संस्थाओं से है जो धारा 7 (अ) में उल्लेखित है।

16.'इकाईयां' अथवा ''महासभा इकाईयां' से तात्पर्य उन ट्रस्टों से है जो धारा 7 (अ) में उल्लेखित है।

5 कार्यालय :-
1. महासभा के महामंत्री का कार्यालय 'महासभा का महामंत्री कार्यालय' होगा।

2. महासभा की कार्यसमिति के निश्चियानुसार जहां हासभा से सम्बन्धित समस्त अभिलेख, प्रपत्र (दस्तावेज) एवं अन्य महत्वपूर्ण सामग्री रखी जाएगी तथा जहां महासभा द्वारा नियुक्त कर्मचारी होंगे वह महासभा का (स्थायी) केन्द्रीय कार्यालय होगा।

6 बहिष्कार विषयक नीति :-
महासभा में प्रस्तुत होने वाले किसी भी प्रस्ताव में सामाजिक बहिष्कार की नीति को स्थान नहीं दिया जाएगा।

7 महासभा का संगठन :-
(अ) निम्न समितियों/संस्थाएं, महासभा के अवयव हलाएंगे।
1. कार्यसमिति
2. कार्यकारी मण्डल
3. प्रादेशिक सभाएं
4. जिला सभाएं
5. तहसील सभाएं
6. ग्राम एवं नगर सभाएं
7. अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी युवा संगठन ।
8. अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महिला संगठन ।
9. महासभा द्वारा प्रकाद्गिात मुख पत्र ''माहेश्वरी ' का संचालक मण्डल (बोर्ड)।
10. महासभा द्वारा गठित अ.भा. माहेश्वरी प्रोफेशनल प्रकोष्ठ।
(आ) महासभा द्वारा प्रेरित निम्न संस्थाएं महासभा की इकाईयां कहलाएंगी -
1. श्रीकृष्णदास जाजू स्मारक ट्रस्ट
2. श्री कोठारी बंधु शौय स्मृति ट्रस्ट।
3. श्री आदित्य विक्रय बिड़ला मेमोरियल व्यापार सहयोग केन्द्र।
4. श्री रामगोपाल माहेश्वरी स्मृति शिक्षा केन्द्र।
5. महासभा द्वारा प्रेरित, स्थापित, निर्मित अन्य ट्रस्ट, सोसायटी, कम्पनी या संस्था।

8 महासभा की सदस्यता :-
1. सामान्य सदस्य - माहेश्वरी समाज के सर्व स्त्री, पुरूष जिनकी आयु 18 वर्ष से कम न हो, महासभा के सामान्य सदस्य माने जाएंगे।
2. सक्रिय सदस्य - महासभा श्रृंखलाबद्ध संगठन के तहत्‌ ग्राम, तहसील, जिला अथवा प्रादेशिक सभा के क्षेत्र में रहने वाले माहेश्वरी भाई-बहन सम्बन्धित विभाग की इकाईयों के नियमानुसार द्गाुल्क देकर सक्रिय सदस्य बन सकेंगे। यह सदस्य उस इकाई की सभाओं में एवं कार्यकारिणी के चुनाव में भाग ले सकेंगे।
3. सहयोगी सदस्य - कार्यसमिति द्वारा समय-समय पर निर्धारित सत्र द्गाुल्क देने वाले व्यक्ति सहयोगी सदस्य माने जाएंगे। उस सत्र की प्रत्येक कार्यकारी मंडल की बैठक की सूचना सहयोगी सदस्य को दी जाएगी। विषयों की चर्चा में वे सहभागी हो सकेंगे लेकिन उन्हें मतदान का अधिकार नहीं होगा।

9 सदस्यता के नियम :
1. सामान्यतः महासभा के सभी सदस्यों के अधिकार समान होंगे। परन्तु महासभा के कार्यकारी मण्डल एवं कार्यसमिति की बैठकों में मतदान का अधिकार केवल कार्यकारी मण्डल एवं कार्यसमिति के सदस्यों को ही होगा।
2. महासभा के कार्यकारी मण्डल की तथा कार्य समिति की सदस्यता सम्बन्धी नियम-उपनियम बनाने एवं शुल्क निर्धारण करने का अधिकार महासभा की कार्यसमिति को होगा।
3. तहसील सभा, जिला सभा एवं प्रदेश सभा आदि की सदस्यता के नियम - उपनियम बनाने तथा सक्रिय द्गाुल्क निर्धारण का अधिकार प्रदेश सभा को होगा
4. धारा - 7 के अन्तर्गत उल्लेखित अवयवों के पदाधिकारियों तथा सदस्यों के लिये महासभा के नियमों एवं आचार संहिता का पालन अनिवार्य होगा। इकाईयों के पदाधिकारी तथा सदस्यों के लिए आचार संहिता का पालन अपेक्षित होगा।

10 ग्राम, नगर, तहसील, जिला एवं प्रादेशिक सभाएं :-
1. श्रृंखलाबद्ध संगठन के निर्माण हेतु ग्राम, नगर, तहसील, जिला एवं प्रदेश सभा का, महासभा द्वारा प्रकाशित मॉडल विधान अथवा महासभा द्वारा मान्यता प्राप्त प्रादेशिक विधानानुसार गठन होगा।
2. प्रत्येक प्रादेशिक सभा को अपना प्रतिवेदन तथा पारित हिसाब महासभा के महामंत्री कार्यालय को वर्द्गा समाप्ति से अधिकाधिक छः माह में प्रेषित करना अनिवार्य होगा।
3. प्रादेशिक सभा आवश्यकतानुसार जिला सभा स्थापित करेगी। जिला सभा आवश्यकतानुसार ग्राम, नगर एवं तहसील सभाओं की स्थापना करेगी।
4. जिला सभा अपने अन्तर्गत आने वाली सभाओं की क्षेत्र निर्धारण और नामकरण कर सकेगी।
5. प्रादेशिक कार्यकारिणी के प्रतिनिधियों का निर्वाचन जिला सभाओं के द्वारा होगा। अ.भा. कार्यकारी मण्डल सदस्यों का निर्वाचन जिला सभाओं द्वारा प्रदेश कार्यकारिणी के निर्देशानुसार होगा।
6. तहसील, जिला तथा प्रदेद्गा सभा हेतु मॉडल विधान महासभा द्वारा स्वीकृत है। उनमें परिस्थिति के अनुरूप कुछ परिवर्तन करके कार्यसमिति की सहमति से हर प्रदेश सभा मॉडल विधान अपनाएगी और उसके अनुसार तहसील, जिला तथा प्रदेद्गा सभा का गठन करेगी।
7. जिन प्रादेशिक सभाओं का वर्तमान विधान कार्यसमिति द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है, उन प्रादेशिक सभाओं के लिय यह अनिवार्य होगा कि वे अपने विधान में आवश्यक संशोधन करके कार्यसमिति द्वारा मान्यता प्राप्त करवा लेवे।
8. अनुशासन के सन्दर्भ में श्रृंखलाबद्ध संगठन के तहत्‌ निर्मित सभी अवयवों पर महासभा का नियंत्रण सर्वोपरि एवं सर्वमान्य होगा।

11 संगठनात्मक अवयव - गठन, चुनाव आदि :-
1. समाज के विशिष्ट समूह अथवा कार्य के लिए महासभा विभिन्न संगठनात्मक अवयव स्थापित कर सकेगी। जैसे कि महिलाओं के लिए अ.भा. माहेश्वरी महिला संगठन एवं युवा वर्ग के लिये अ.भा. माहेश्वरी युवा संगठन है।
2. ऐसे संगठन महासभा के उद्देश्य एवं नीति के अन्तर्गत कार्य करेंगे। महासभा उनके कार्य संचालन हेतु उचित दिशा-निर्देश तथा आर्थिक सहयोग दे सकेगी।
3. ऐसे संगठनों को अपना वार्षिक हिसाब वर्ष समाप्ति के छः महिने के भीतर अंकेक्षित कराकर कार्यसमिति को भेजना होगा।
4. ऐसे संगठनों के चुनाव महासभा के चुनाव से सुसंगत होंगे। यदि चुनाव नहीं हो पाये तो कार्यसमिति उनके लिये तदर्थ समिति गठित कर सकेगी।
11 (अ) माहेश्वरी पत्र :-
1. माहेश्वरी पत्र महासभा का मुखपत्र है।
2. माहेश्वरी पत्र के संचालन हेतु 5 सदस्यीय 'संचालक मण्डल' (बोर्ड) जिसमें एक अध्यक्ष तथा एक संचालक होगा का गठन कार्यसमिति द्वारा किया जाएगा।
3. माहेश्वरी पत्र का वार्षिक हिसाब संचालक द्वारा वर्ष समाप्ति से छ' माह के भीतर कार्यसमिति को प्रेषित किया जायेगा।
4. महासभा के उद्देश्यों के परिपेक्ष में माहेश्वरी पत्र में सामग्री प्रकाशन के विषय में निर्णय लने का अधिकार संचालक मण्डल को होगा।
11 (ब) महासभा के द्वारा ट्रस्टों का निर्माण :-
महासभा के उद्देद्गयों के पूर्ति हेतु महासभा, प्रादेशिक सभा तथा जिला सभा को विविध ट्रस्ट, सोसायटी, कम्पनी या संस्था स्वतंत्र इकाईयों के रूप में निर्मित एवं स्थापित करने का अधिकार होगा। मुखयतः आयकर में छूट प्राप्त करने हेतु यह अनिवार्य होता है। ऐसी संस्थाओं की स्थापना एवं पंजीकरण हेतु जो ट्रस्ट डीड बनाई जाएगी उसमें यह सुनिश्चित किया जाना चाहिये कि प्रस्तावित ट्रस्ट, सोसायटी, कम्पनी या संस्था उनकी ट्रस्ट डीड के प्रावधनों की परिधि में स्वतंत्र रूप से कार्य करते हुए भी महासभा, प्रदेश एवं जिला सभा के नीति निर्देशों के अनुसार एवं सम्पूर्ण समन्वय रखते हुवे कार्य कर पायेगे। वर्तमान में कार्य पंजीकृत ट्रस्टों का महासभा से सम्पूर्ण समन्वय बना रहें, इस हेतु उपरोक्त प्रावधान की भावना को ध्यान में रखते हुवे, आवद्गयकतानुसार सम्बन्धित इकाईयों के ट्रस्ट डीड में संशोधन हेतु कहा जाना चाहिए।
11 (क) कार्यकारी मण्डल एवं कार्यसमिति - कार्य परिधि :-
कार्यकारी मण्डल एवं कार्यसमिति महासभा उद्देश्यों की पूर्ति हेतु कार्य करने वाले दो मुखय अवयव है। उद्देश्यों का, नीति निर्धारण का तथा उसकी पूर्ति करने का कार्य इन्हीं दो अवयवों तथा इनके सदस्यों का होगा। उद्देद्गयों पूर्ति एवं गतिविधियों का संचालन करने में, सुगमता हो इस दृष्टि से सामान्यतः कार्यसमिति कार्य में गति देने में पहले करेगी एवं निर्णय ले सकेगी।
कार्यसमिति को अपने लिये गये नितिगत निर्णयों की पुष्टि कार्यकारी मण्डल की आगामी बैठक में कराना अनिवार्य होगा। सामान्यतः कार्यसमिति नीति निर्धारण के निर्णयों के प्रति कार्यकारी मण्डल को जवाबदेह रहेगी।
कार्यकारी मण्डल एवं कार्यसमिति के दायित्व एवं अधिकारों को इस संविधान में जो उल्लेख है उसे सामान्यतः एक-दूसरे का पूरक समझना चाहिये।

12 कार्यकारी मण्डल का गठन :-
व्यवस्था की दृष्टि से महासभा कार्यक्षेत्र को चार भौगोलिक अंचलों में विभाजित किया है। पूर्वांचल, उत्तरांचल,पश्चिमांचल तथा दक्षिणांचल। इन चार अंचलों को कार्यसुविधा की दृष्टि से 22 प्रदेशो में विभाजित किया है। महासभा के उद्देश्यों को अग्रसर करने हेतु कार्यकारी मण्डल का गठन निम्नानुसार होगा |
(अ) प्रादेशिक सभा द्वारा निर्वाचित सदस्य।
(आ) पदेन सदस्य।
(इ) सभापति द्वारा मनोनीत सदस्य।
(ई)विशेष सदस्य।


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