अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महिला संगठन
विधान - (संशोधित : 14 जनवरी 1998)
वर्तमान पदाधिकारी
| अध्यक्ष | श्रीमती लता लाहोटी | पूना |
| वरिष्ठ उपाध्यक्ष | श्रीमती शान्ता डागा | नागपुर |
| उपाध्यक्ष (पूर्वांचल) | श्रीमती शोभा सादानी | कलकत्ता |
| उपाध्यक्ष (पश्चिमांचल) | श्रीमती कमला सोमानी | जयपुर |
| उपाध्यक्ष (उत्तरांचल) | श्रीमती मंजु लढ़ा | कानुपर |
| उपाध्यक्ष (दक्षिणांचल) | श्रीमती सूरज बाहेती | मद्रास |
| महामंत्री | श्रीमती गीता मूंदडा | इन्दौर |
| अर्थमंत्री | श्रीमती लीला सारडा | नागपुर |
| सहमंत्री (पूर्वांचल) | श्रीमती वीजा साबू | रांची |
| सहमंत्री (पश्चिमांचल) | श्रीमती शकुंतला चाण्डक | ग्वालियर |
| सहमंत्री (उत्तरांचल) | श्रीमती इन्द्रा हुरकठ | आगरा |
| सहमंत्री (दक्षिणांचल) | श्रीमती रत्नमाला साबू | हैदराबाद |
| निवर्तमान अध्यक्ष | श्रीमती मनोरमा लढा | ग्वालियर |
| पूर्व अध्यक्ष | श्रीमती पद्मादेवी मूंदडा | अमरावती |
| भूतपूर्व अध्यक्ष | श्रीमती ज्ञानकुमारी हेडा | हैदराबाद |
1. नाम :-
इस संगठन का नाम ''अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महिला संगठन'' होगा। यह अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा की एक इकाई के रूप में उसके अन्तर्गत ही कार्य करेगा।
2. कार्यक्षेत्र :-
इस संस्था का कार्यक्षेत्र भारतवर्ष व अन्य क्षेत्र जहां माहेश्वरी परिवार निवास करते हैं।
3. उद्देश्य:-
नारी जागृति एवं नारी विकास के साथ-साथ माहेश्वरी समाज की महिलाओं का समयानुकूल सर्वांगीण विकास हो सके एवं बदलते परिवेश में अनावश्यक रूढ़िवादी विचारधाराओं से मुक्त होकर नारी जाति का आदर्श बन सकें। महिला संगठन द्वारा स्थापित व संचालित संस्थाओं का लाभ यथा सम्भव अन्य समाजों को भी देना।
4. उद्देश्य की पूर्ति के साधन :-
1. उपरोक्त उद्देश्य की पूर्ति के लिए सामाजिक सुधार का प्रयत्न करना, शिक्षा का प्रचार एवं प्रसार, आर्थिक उन्नति, अध्यात्मिक, सांस्कृतिक तथा शारीरिक उत्थान आदि का प्रयत्न व प्रयास करना तथा इन कार्यों के साध्य के लिये स्थानीय संगठन बनाना, सम्पर्क बढाना, सहयोग करना, पत्र पत्रिकाओं व प्रचार सामग्री का प्रकाशन एवं प्रबन्ध करना, चर्चा सत्रों का आयोजन करना आदि।
2. समाज के असहाय, अपंग, अस्वस्थ निराश्रितों एवं जरूरतमंद, बच्चों एवं स्त्रियों की मदद करना।
3. आवश्यकता पडने पर महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें, इसके लिए उन्हें मार्गदर्शन करना, उन्हें कार्य दिलाने में सहयोग देना तथा उद्योग चलाने के लिए प्रशिक्षण एवं प्रेरणा देना।
4. शिक्षा एवं सहयोग के लिए बहनों को सामाजिक ट्रस्टों की जानकारी देना तथा आवश्यकतानुसार धन दिलवाने का प्रयास करना।
5. संगठन के उद्देश्यों को अग्रसर करने के लिये, समय-समय पर वाद-विवाद गोष्ठी, सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनी, व्यायाम, खेलकूद, रक्त शिविर, बाल संस्कार शिविर, चिकित्सा व स्वास्थ्य परीक्षण केन्द्र आदि
विविध प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करना एवं करवाना।
6. निर्धारित कार्यों एवं योजनाओं के लिये धन संग्रह करना तथा संस्था मूलतः विचार प्रधान रहेगी।
7. आर्थिक दृष्टि से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए तथा औद्योगिक शिक्षा के लिए प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित करवाना। इन कार्यों के लिए आवश्यक सभा या न्यास स्थापित करना।
8. राष्ट्रीय एवं स्थानीय स्तर पर सामाजिक कार्यों में भाग लेना तथा सहयोग करना।
5. सिद्धान्तः-
सहयोग, सेवा, संकल्प, संस्कृति, संयम, समर्पण, सादगी, अनुशासन व सुधार संगठन के मुखय सिद्धान्त होंगे।
6. नीति :-
संगठन में प्रस्तुत होने वाले किसी प्रस्ताव में सामाजिक बहिष्कार को स्थान नहीं दिया जाएगा, किन्तु जिन परिवारों में बुजुर्गों को प्रताड़ित करने, बहुओं को जलाने, मारने, पीटने या अत्याचार करने की घटना समक्ष आने पर सावधानीपूर्वक सामाजिक हस्ताक्षेप किया जा सकेगा।
7. परिभाषाएं :-
इस विधान में दिये गये शब्दों का अर्थ नीचे लिखी परिभाषा के अनुसार माना जायेगा -
(क) ''संगठन'' अर्थात् 'अखिल भारतवर्षीय महिला संगठन'
(ख) 'महासभा' शब्द से तात्पर्य है उन व्यक्तयो से है जो माहेश्वरी है
(ग) 'कार्यकारी मंडल' संगठन द्वारा गठित कार्यकारी मण्डल
(घ) 'कार्यसमिति' महिला संगठन द्वारा निर्वाचित सभी पदाधिकारी एवं सदस्य ही कार्यसमिति है
(च) अचंल व प्रादेशिक क्षेत्रों का अर्थ संगठन के लिए महासभा द्वारा निर्धारित भौगोलिक क्षेत्रों से है
(छ) जिला सभा से तात्पर्य जिला क्षेत्र की सभाओं से है
(ज) तहसील सभा से तात्पर्य तहसील क्षेत्रों की सभाओं से
(झ) ग्राम सभा से तात्पर्य ग्राम स्तर की सभाओं से है
8. प्रधान कार्यालय :-
संगठन के कार्यकारी मण्डल तथा कार्य समिति का किसी स्थान पर प्रधान कार्यालय होगा, जहां संगठन से सम्बन्धित समस्त कागजात एवं सामग्री रखी जायेगी, संगठन द्वारा नियुक्त कर्मचारी रखे जायेंगे।
जब तक संगठन का स्थाई कार्यालय निश्चित नहीं होता तब तक महामंत्री द्वारा प्रदत्त स्थान ही प्रधान कार्यालय होगा।
9. संगठन का स्वरूप :-
1. कार्य समिति।
2. कार्यकारी मण्डल।
3. आंचलिक, प्रादेशिक व क्षेत्रीय सभाएं।
4. जिला, तहसील (तालुका) व स्थानीय सभाएं।
5. संगठन द्वारा प्रकाशित पत्र ''नव नारी जागृति'' एवं उसका संचालक मण्डल।
6. समय-समय पर संगठन द्वारा प्रेरित, स्थापित, संचालित अन्य संगठन या न्यास।
7. स्थानीय माहेश्वरी महिला मण्डल या उसके किसी अंग द्वारा स्थापित संस्था जैसे महिला क्लब, नवयुवति मण्डल, तरूणी संघ तथा अन्य किसी नाम से संबोधित माहेश्वरी महिला मण्डल।
10. सम्बद्धता के नियम :-
अ.भा. माहेश्वरी महिला संगठन द्वारा निर्धारित सम्बद्धता फार्म भरने पर सभी प्रादेशिक महिला संगठनों को सम्बद्धता प्राप्त हो सकेगी।
सम्बद्धता सम्बन्धी नियम बनाने व शुल्क निर्धारित करने का अधिकार कार्यसमिति को होगा।
11. सदस्यता :-
सामान्य सदस्य - माहेश्वरी समाज के सर्व सामान्य महिलाएं जिनकी आयु 18 वर्ष से अधिक हो महिला संगठन की सामान्य सदस्य मानी जायेगी।
सहयोगी सदस्य - महिला संगठन द्वारा निर्धारित शुल्क देने वाली सहयोगी सदस्य मानी जायेगी।
सदस्यता के उपनियम :-
1. सामान्यतः महिला संगठन के सभी सदस्याओं को समान अधिकार होंगे। किन्तु चुनावों एवं प्रबन्धक विषयक मामलों में मतदान करने का अधिकार केवल कार्यकारी मण्डल को ही होगा।
2. विषम परिस्थितियों में किसी विषय पर समान मत होने पर अध्यक्ष का एक अतिरिक्त मत होगा।
3. सदस्यता सम्बन्धी श्रेणी बढ़ाने, नियम-उपनियम बनाने, शुल्क निर्धारण, परिवर्तन, परिवर्धन करने का अधिकार कार्यकारी मण्डल को ही होगा।
4. तहसील जिला एवं प्रदेश संगठनों सदस्यता के नियम-उपनियम बनाने तथा शुल्क निर्धारण का अधिकार प्रदेश संगठन को होगा। इस सम्बन्ध में अ.भा. संगठन द्वारा स्वीकृत मानदंण्ड मार्गदर्शक माने जायेंगे।
5. धारा-9 के अन्तर्गत अ.भा. संगठन के अंग के रूप में उल्लेखित संस्थाओं के सदस्यों के लिए अ.भा. संगठन के नियमों का एवं आचार संहिता का पालन करना अनिवार्य होगा।
12. स्थानीय संगठन :-
1. जिस गांव, नगर-शहर में कम से कम 10 परिवार निवास करते हो वहां स्थानीय महिला संगठन स्थापित हो सकेंगे।
2. महिला संगठन के उद्देश्यों एवं नीति को ध्यान में रखकर स्थानीय तथा सम्बन्धित संगठन अपने निर्णय करने, नियम बनाने तथा विधान बनाने के लिए स्वतंत्र होंगे। परन्तु संगठन के मूल उद्देश्य का ध्यान रखना होगा।
3. प्रत्येक स्थानीय संगठन एवं तहसील संठन का कर्तव्य होगा कि वह अपने कार्य वर्ष समाप्ति के पश्चात अपना वार्षिक प्रतिवेदन यथा शिघ्र (अधिक से अधिक चार माह में) जिला संगठन को भेजें। इस तहर जिला संगठन अपना प्रतिवेदन प्रदेश संगठन को तथा प्रदेश संगठन अपना प्रतिवेदन अ.भा. संगठन (अधिक से अधिक 6 माह में) को प्रेशित करें। वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत न करने वाली इकाई को निष्क्रिय माना जा सकेगा। प्रतिवेदन गलत होने पर कार्यसमिति उचित निर्णय ले सकेगी।
4. जिन गांवों या नगरों में माहेश्वरी परिवार कम हों वहां राजस्थानी महिला संगठन के नाम से महिला संगठन बनाया जा सकेगा, किन्तु इसका प्रतिवेदन अ.भा. संगठन को भेजना आवश्यक होगा।
5. सुविधा की दृष्टि से महानगरों में अलग-अलग महिला मंडल स्थापित किया जा सकेगा। किन्तु केन्द्रीय मंडल एक ही होगा तथा अन्य सभी मंडल इसके अन्तर्गत रहकर कार्य करेंगे। वर्ष में एक बार सभी की सम्मिलित बैठक केन्द्रीय मण्डल के साथ होना आवश्यक है।
13. श्रृंखलाबद्ध गठन :-
1. श्रृंखलाबद्ध संगठन का निर्माण करने हेतु ग्राम, तहसील, जिला एवं प्रदेश संगठन का गठन होगा।
2. प्रादेशिक संगठन परिवारों की संखया के आधार पर- जिला संगठन स्थापित करेंगे। जिला संगठन आवश्यकतानुसार ग्राम, तहसील अथवा क्षेत्रीय संगठनों की स्थापना करेगी।
3. प्रदेश संगठन तथा जिला संगठन अपने अन्तर्गत आने वाले संगठनों का क्षेत्र निर्धारण और नामकरण कर सकेंगे।
4. प्रदेश कार्यकारिणी के लिए जिला संगठन अपने निर्धारित कोटे के अनुसार प्रतिनिधि भेजेंगे एवं अ.भा. कार्यकारी मंडल के लिए प्रादेशिक संगठन अपने निर्धारित कोटे के अनुसार प्रतिनिधि भेजेंगे।
5. अनुशासन के मामलों में सभी अधीनस्थ संगठनों पर अ.भा. संगठन का नियंत्रण सर्वोपरि होगा।
14. प्रादेशिक एवं आंचलिक संगठन :-
संगठन के कार्यों की सुगमता हेतु भौगोलिक रूप से चार अंचलों में विभाजित होगा।
1. पूर्वांचल, 2. उत्तरांचल, 3. पद्गिचमांचल, 4. दक्षिणांचल।
इन चार अंचलों का कार्य सुविधा की दृष्टि से 22 प्रदेशो में विभाजित होगा, प्रत्येक प्रादेशिक संगठन धारा 13 के अनुसार गठित होगा।
विविध अंचल, प्रदेश और कार्यकारी मण्डल हेतु उन प्रदेशो की प्रतिनिधि संख्या निम्नानुसार होगी :-
पूर्वांचल (47)
कलकत्ता - 15
प. बंगाल - 5
बिहार - 10
उड़ीसा - 5
आसाम एवं निकटवर्ती क्षेत्र - 7
नेपाल, सिक्क्मि, मेघालय आदि - 5
उत्तरांचल (50)
पूर्वी उत्तरप्रदेश - 10
मध्य उत्तरप्रदेश - 10
पद्गिचमी उत्तरप्रदेश - 13
दिल्ली - 10
पंजाब, हरियाणा,
कश्मीर , हिमाचल - 7
पश्चिमांचल (72)
राजस्थान - 30
गुजरात - 10
पूर्वी मध्यप्रदेश - 10
मध्य मध्यप्रदेश - 10
पद्रिचम मध्यप्रदेश - 12
दक्षिणांचल (75)
मुम्बई - 10
महाराष्ट्र - 20
विदर्भ - 15
आन्ध्र - 10
तमिलनाडू, केरल, पांडिचेरी - 10
कर्नाटक, गोवा - 10
कुल प्रतिनिधि संखया - 244
अंचल एवं प्रदेश का पुनः निर्धारण एवं प्रतिनिधि संखया घटाने-बढ़ाने का अधिकार कार्यकारी मण्डल को होगा। विदेशो में अस्थाई निवास करने वाली माहेश्वरी महिला अपने से सम्बन्धित देश या स्थानीय मण्डल की सदस्य हो सकेगी।
कार्यकारी मण्डल की सदस्य को स्थानीय मण्डल का सदस्य होना अनिवार्य होगा। अ.भा. माहेश्वरी महिला संगठन के कार्यकारी मण्डल के सदस्य जिस तहसील, जिला या प्रदेश में निवास करते हैं उस तहसील, जिला एवं प्रदेश सभा की कार्यकारिणी के पदेन सदस्य होंगे।
15. संगठनात्मक अवयव :-
'नव नारी जागृति' अ.भा. माहेश्वरी महिला संगठन के मुखपत्र के संचालन हेतु 5 सदस्यीय संचालक मण्डल (बोर्ड) का गठन कार्यसमिति द्वारा किया जायेगा। इन सदस्यों में से एक सदस्य संचालक मण्डल के अध्यक्ष व एक सदस्य संचालक का प्रभार सम्भालेंगे। ''नव नारी जागृति'' का वार्षिक अंकेक्षित हिसाब संचालक द्वारा कार्य समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा।
महिला संगठन के परिप्रेक्ष में ''नव नारी जागृति'' में कोई सामग्री प्रकाशित करने या न करने के बारे में निर्णय लेने का अधिकार संचालक मण्डल को होगा।
16. मान्यता रद्द करने का अधिकार :-
निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने की अवस्था में, असंतोषजनक स्पष्टीकरण मिलने पर कार्यसमिति को अधिकार होगा कि वह उस संगठन/संस्था की मान्यता रद्द कर दे अथवा भंग कर दें।
17. तदर्थ समिति :-
किसी संगठन या संस्था की मान्यता रद्द होने पर कार्यसमिति को अधिकार होगा कि वह नये निर्वाचन का प्रबन्ध करें तथा नवनिर्वाचन तक कार्य संचालन के लिए तदर्थ समिति का गठन करें। स्थापित तदर्थ समिति को गठित संगठन के अनुसार पूर्ण अधिकार प्राप्त होंगे।
18. कार्यकारी मण्डल का गठन, दायित्व एवं अधिकार :-
अ.भा. महिला संगठन के कार्य संचालन के लिए अखिल भारतवर्षीय कार्यकारी मण्डल होगा। धारा-14 के अनुसार प्रादेशिक संगठनों की प्रतिनिधि संखया होगी। यह संखया घटाई-बढ़ाई भी जा सकती है, किन्तु यह कार्य कार्यसमिति और कार्यकारी मण्डल की संयुक्त बैठक में निर्णय लेने के बाद ही किया जायेगा। चुनाव करते समय प्रादेशिक संगठन माहेश्वरी परिवारों की पर्याप्त संख्या वाले जिलों के प्रतिनिधित्व का ध्यान रखेंगे।
कार्यकारी मण्डल के सदस्याओं को न्यूनतम निर्धारित कार्य पूर्ण करने की जिम्मेदारी लेनी होगी :-
1. महिला संगठन के सभी पदाधिकारी, कार्य समिति के सदस्य, भूतपूर्व अध्यक्ष, महामंत्री एवं निवर्तमान सत्र के सभी पदाधिकारी कार्यकारी मण्डल के सदस्य होंगे।
2. विगत महिला महाधिवेशन के स्वागताध्यक्ष एवं स्वागत मंत्री।
3. अध्यक्ष द्वारा मनोनीत 10 सदस्य।
4. प्रदेश अध्यक्ष निर्धारित कोटे के अनुसार कार्यकारी मण्डल के लिए जो नाम भेजेगी उसमें निवर्तमान सत्र के पदाधिकारी एवं वर्तमान सत्र के प्रदेश मंत्री का समावेश आवश्यक होगा।
दायित्व :-
क-संगठन के उद्देद्गयों को अग्रसर करने एंव पारित संगठन के क्रियान्वन का दायित्व कार्यकारी मण्डल पर होगा। विविध योजनायें नियम-उपनियम एवं उपसमिति को बनाने का अधिकार होगा।
ख-महिला संगठन के किसी पदाधिकारी या कार्य समिति सदस्य का स्थान रिक्त होने पर कार्य समिति को अधिकार होगा कि वह रिक्त पद की पूर्ति लें।
ग-कार्यकारी मण्डल के जो सदस्य बिना सूचना दिए लगातार तीन बैठकों में अनुपस्थित रहेंगे, उनके स्थान कार्य समिति द्वारा रिक्त घोषित किये जा सकेंगे।
घ-निधन, अनुपस्थिति अथवा त्याग पत्र के कारण कार्यकारी मण्डल के सदस्यों के जो स्थान रिक्त होंगे, उनके स्थान पर सम्बन्धित प्रादेशिक संगठन उसी क्षेत्र विशेष से नये सदस्य मनोनीत कर सकेगी।
ड-कार्यकारी मण्डल की बैठक अध्यक्ष जी की अनुमति द्वारा बुलाई जायेगी। विशेष परिस्थितियों में अध्यक्ष स्वयं बैठक बुला सकेंगे। वर्ष में कम से कम एक बैठक का होना अनिवार्य होगा। बैठक के लिए कोरम 21 सदस्यों का होगा जिनमें पदाधिकारी भी सम्मिलित है। बैठक की सूचना 30 दिन पूर्व डाक द्वारा प्रसारित की जायेगी, जिसमें विचारार्थ विषयों की सूची अंकित होगी। अध्यक्षा जी की अनुमति से अन्य विषयों पर भी विचार हो सकेगा।
च-यदि कार्यकारी मण्डल के कम से कम 51 सदस्य किसी विशेष कार्य से बैठक बुलाने हेतु अध्यक्षा जी को लिखित आवेदन स्थान के निमंत्रण सहित देंगे तो अध्यक्षा जी आवेदन में उल्लेखित विषयों पर विचारार्थ बैठक बुलवायेंगे। उक्त आवेदन पर यदि अध्यक्षा जी बैठक नहीं बुलवाती हैं तो कार्यकारी मण्डल स्वयं 60 दिन के बाद 90 दिन के भीतर 30 दिन की सूचना डाक से देकर स्वयं बैठक बुलवा सकती है। इस प्रकार विद्गोष बैठक में उल्लेखित विषयों पर ही विचार किया जायेगा।
छ-कार्यकारी मण्डल के सदस्यों को कार्यसमिति द्वारा निर्धारित शुल्क देना अनिवार्य होगा शुल्क बकाया रहने पर मत देने का अधिकार नहीं रहेगा।
19. कार्य समिति एवं पदाधिकारियों का चुनाव :-
संगठन के कार्यों को सुगमतापूर्वक चलाने तथा उपस्थित प्रश्नों एवं समस्याओं का शिघ्र निर्णय करने के लिये कार्यकारी मण्डल के सदस्यों में से कार्य समिति का गठन किया जायेगा। पदाधिकारियों को मिलाकर कार्य समिति के सदस्यों की कुल संखया 41 होगी। इनका गठन निम्न प्रकार से होगा।
क- धारा 20 के अनुसार पदाधिकारी 12
ख- प्रदेशो से निर्वाचित 22
ग- अध्यक्ष द्वारा मनोनीत 04
घ- निर्वतमान अध्यक्ष एवं महामंत्री 02
ड- संगठन के ''मुख पत्र'' के संचालक 01
कुल 41
कार्य समिति में प्रदेशो का प्रतिनिधित्व -
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पदेन सदस्य :-
1. संगठन के सभी भूतपूर्व अध्यक्ष
2. वर्तमान सत्र के प्रदेशाध्यक्ष
3. सभी समिति संयोजक
20. पदाधिकारी :-
संगठन के निम्नलिखित पदाधिकारी होंगे -
अध्यक्ष 1
उपाध्यक्ष 4
महामंत्री 1
अर्थमंत्री 1
संगठन मंत्री 1
संयुक्त मंत्री 4
कुल 12
21. अध्यक्ष का निर्वाचन :-
विधान की धारा 19 के अनुसार कार्यसमिति के निर्वाचित एवं पदेन सदस्य अपने में से अधिकतम 3 सदस्यों का चयन कर उनके नामों का पेनल महासभा को प्रेषित करेगी। महासभा कार्यसमिति इनमें से किसी एक को अध्यक्ष मनोनीत/घोषित करेंगी। इस घोषणा के बाद मण्डल की प्रथम बैठक में अध्यक्ष को स्वतः कार्य संचालन का अधिकार प्राप्त हो जायेगे।
22. पदाधिकारियों का चयन :-
क- अध्यक्ष के चयन के पश्चात नव-निर्वाचित अध्यक्ष की अनुशसा पर पदाधिकारियों का चयन कार्य समिति व कार्यकारी मण्डल के सदस्यों में से करेगी। निवृत्तमान कार्यसमिति के सदस्यों में से कम से कम 6 सदस्यों को लिया जाना आवश्यक है। 4 उपाध्यक्ष एवं 4 संयुक्त मंत्रियों का अलग-अलग अंचलों से होना अनिवार्य है। पदाधिकारियों की नियुक्ति के लिए कार्यसमिति व कार्यकारी मण्डल का सदस्य होना अनिवार्य होगा।
ख- पदाधिकारियों के निर्वाचन से कार्य समिति या कार्यकारी मण्डल के जो स्थान रिक्त होंगे, उसकी पूर्ति सम्बन्धित प्रदेशो द्वारा की जायेगी।
23. पदाधिकारियों के उत्तरदायित्व एवं अधिकार :-
अध्यक्ष -
महिला संगठन के विशेष एवं साधारण अधिवेशन कार्यकारी मण्डल तथा कार्य समिति की बैठकों की अध्यक्षता करेगी। अध्यक्ष महिला संगठन के समस्त कार्य संचालन के लिए उत्तरदायी होंगी। सभी पदाधिकारियों एवं कार्य समिति के सदस्यों में कार्य वितरण भी कर सकेंगी।
उपाध्यक्ष -
अध्यक्ष की अनुपस्थिति में सभा की अध्यक्षता उस अंचल की उपाध्यक्ष, महामंत्री के सहयोग से करेगी तथा अपने अंचल के लिए निर्धारित कार्यों को पूर्ण कराने की जवाबदारी उनकी रहेगी।
महामंत्री -
संगठन के दैनन्दिन कार्य संचालन का दायित्व महामंत्री का होगा। जो कार्यकारी मंडल एवं कार्यसमिति के निश्चयानुसार कार्य करते हुए संगठन को सुदृढ़ करने में अध्यक्ष का सहयोग करेगी। संगठन कार्यालय के संचालन, कार्यकारी मण्डल एवं कार्यसमिति की बैठकों की कार्यवाही रखने, संगठन के कर्मचारियों की नियुक्ति करने तथा संगठन की ओर से पत्र-व्यवहार करने और विविध कार्यवाही करने का दायित्व महामंत्री का होगा। महिला संगठन के समस्त अभिलेख और महत्वपूर्ण प्रपत्र आदि महामंत्री की अभिरक्षा में रहेंगे। वे संगठन के स्वीकृत बजट के अनुसार खर्च करेगी। पदमुक्त होने पर अपने कार्यकाल की सभी कार्यवाही नव निर्वाचित मंत्राणी को जल्दी भेंट करेंगी।
अर्थ मंत्री -
संगठन का बजट तैयार करेगी। स्वीकृत बजट के अनुसार अर्थ संग्रह की योजना बनायेगी। महिला संगठन का हिसाब तैयार करेगी तथा उसे ऑडिटर से ऑडिट करवा कर कार्य समिति एवं कार्यकारी मण्डल के समक्ष स्वीकृति के लिये प्रस्तुत करेंगी।
संगठन मंत्री -
अध्यक्ष, महामंत्री एवं कार्यसमिति के निर्देद्गाानुसार विविध संगठनात्मक कार्य सम्पादित करेंगी।
संयुक्त मंत्री -
महिला संगठन को सुदृढ़ करने के लिए महामंत्री को उनके उत्तर दायित्व के निर्वाह में सक्रिय सहयोग देगी। अध्यक्ष एवं महामंत्री द्वारा सौंपे गये कार्यों की जिम्मेदारी वहन करेंगी। अपने अंचल के कार्य को पूरा कराने में उपाध्यक्ष का सहयोग करेगी।
24. कार्य समिति के सदस्यों का दायित्व :-
1. महिला संगठन के आदेशात्मक एवं नीति नियम, प्रस्तावों का पालन करना सभी
2. संगठन के खर्च के लिए प्रति सत्र कार्यसमिति द्वारा निर्धारित शुल्क देना एवं अपने क्षेत्र के कार्यकारी मण्डल के सदस्यों से शुल्क दिलाना।
3. सौंपे गये कार्यों की जिम्मेदारी वहन करना।
4. कार्य समिति की बैठकों में 60 प्रतिद्गात उपस्थिति अनिवार्य है। लगातार दो बैठकों में बिना सूचना के अनुपस्थित रहने वाले सदस्यों का स्थान रिक्त घोषित किया जा सकेगा।
25. कार्य समिति की बैठक एवं कार्यकाल :-
1. कार्य समिति की बैठक अध्यक्ष जी की अनुमति से महामंत्री जी द्वारा बुलाई जायेगी। विशेष परिस्थिति में अध्यक्ष जी स्वयं बैठक बुला सकेंगी। वर्ष में दो बैठकों का होना आवश्यक होगा। बैठक की गणपूर्ति 10 सदस्यों से होगी, जिनमें पदाधिकारियों के अलावा कम से कम पांच सदस्य अवश्य होंगे। बैठक की सूचना 30 दिन पूर्व डाक से प्रसारित की जायेगी, जिनमें विचारार्थ प्रश्नों की सूची अंकित होगी, अध्यक्ष की अनुमति से अन्य विषयों पर भी विचार किया जायेगा।
2. कार्यकारी मण्डल के सामान्यतः सब अधिकार कार्य समिति को होंगे।
3. साधारणतः कार्यकारी मण्डल व कार्यसमिति का कार्य काल 3 वर्ष का या महासभा के कार्यकारी मण्डल के सत्र के अनुरूप होगा।
26. संगठन का कोष, आय व्यय पत्रक तथा हिसाब :-
(क) संगठन के कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए संगठन खर्च के लिए कोष का निर्माण कर सकेगा। कोष को कार्य समिति द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार बैंक में रखा जायेगा। बैंक में अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महिला संगठन के नाम से खाता खोला जायेगा। जिस पर निम्नलिखित पदाधिकारियों के हस्ताक्षर होंगे -
1. अध्यक्ष। 2. महामंत्री। 3. अथमंत्री।
इनमें से किन्हीं दो के हस्ताक्षर से बैंक का खाता चलाया जा सकेगा। जिसमें अर्थमंत्री का हस्ताक्षर आवश्यक होगा। स्थान विद्गोष के बैक खाते की जिम्मेदारी वहां निवास करने वाले पदाधिकारी की होगी। संगठन के हिसाब के परीक्षण के लिए कार्य समिति अंकेक्षण की नियुक्ति करेगी।
(ख) स्थायी कोष के लिए प्राप्त धन स्थायी निधि के तौर पर कार्यकारी मण्डल के निश्चयानुसार जमा किया जायेगा और उसके ब्याज की आय ही खर्च की जा सकेगी। विशेष परिस्थिति में कार्यकारी मण्डल की अनुमति से ही स्थायी कोष में जमा राशी खर्च की जा सकेगी।
(ग) कार्यकारी मण्डल की बैठक में वार्षिक अनुमानित आय-व्यय पत्रक एवं पूर्व वर्ष का ऑडिट किया हुआ हिसाब 6 महीने के अन्दर प्रस्तुत किया जायेगा। संगठन के कोई भी पदाधिकारी 2000 रू. से अधिक राशी कार्य समिति के बिना अपने पास नगद नहीं रख सकेंगे तथा संगठन के रसीद बुकें, बैंक बुके, रोकड़ खाते सम्भालकर रखने की जिम्मेदारी कोषाध्यक्ष की होगी।
(घ) अनुदान :- कार्यसमिति प्रादेशिक संगठनों या स्थानीय संगठनों की आय का निर्धारित अंश केन्द्रीय खर्च के लिए प्राप्त करने की व्यवस्था अपना सकेगी। संगठन अन्य संगठनात्मक अवयवों से समान उद्देश्य एवं अनुकूल कार्य के लिए आवश्यकतानुसार अनुदान दे/ले सकेगी।
27. मतदान-विधान संशोधन :-
विधान संशोधन का अधिकारी कार्यकार मण्डल को होगा। उपस्थित सदस्यों के दो तिहाई मत से ही विधान में संशोधन किया जा सकेगा। उपरोक्त बैठक में कार्यकारी मण्डल के 1/4 सदस्यों की उपस्थिति आवश्यक होगी।
28. उपनियम :-
1. कार्यकारी मण्डल को अधिकार होगा कि वह आवश्यकतानुसार विधान के पूरक उपनियम बनायें।
2. उप समितियों के कार्यों के सम्बन्ध में कार्य समिति नियम बना सकेगी।
3. चुनाव सम्बन्धी नियम बनाने का अधिकार कार्य समिति को होगा।
4. संगठन को अपनी हर सत्र की रिपोर्ट महासभा को प्रेषित करनी होगी।
5. महासभा कार्यकारी मण्डल हेतु संगठन के प्रतिनिधियों का चयन कार्यसमिति द्वारा किया जायेगा।
6. यह संशोधित विधान दि. 14 जुलाई 1998 को ग्वालियर मीटिंग में सर्वसम्मति से संशोधित किया गया।
29. स्थगित बैठक :-
कार्यकारी मण्डल, कार्य समिति आदि की निर्धारित बैठक में निश्चित समय पर यदि कोरम पूरा न हुआ तो वह सभा स्थगित कर दी जायेगी। स्थगित बैठक पुनः होने पर उसमें कोरम का प्रतिबंध नहीं होगा, उपस्थित सदस्यों की सर्व-सम्मति पर स्थगित बैठक-उसी दिन उसी स्थान पर पुनः हो सकेगी।
30. संगठन का आर्थिक वर्ष 1 अप्रेल से 31 मार्च तक माना जायेगा।
31. अनुशासनात्मक कार्यवाही :-
संगठन के किसी उद्देश्य, प्रस्ताव अथवा नियम का उल्लंघन एवं अवहेलना करने की अवस्था में कार्यसमिति द्वारा किसी भी सदस्य की सदस्यता स्थगित अथवा निलंबित की जा सकेगी। इस प्रकार की कार्यवाही के पूर्व उस सदस्य का स्पष्टीकरण मांगा जायेगा। सम्बन्धित सदस्य कार्यकारी मण्डल को अपील कर सकता है। ऐसे समय में कार्यकारी मण्डल का निर्णय अन्तिम होगा।
32. कानूनी कार्यवाही :-
संगठन के कोष,सम्पत्ति अथवा हिसाब-किताब के सम्बन्ध में आवश्यकतानुसार कानूनी कार्यवाही महामंत्री के नाम से की जाएगी और इस सम्बन्ध में उन्हें योग्य अधिकार प्राप्त होंगे।
33. मध्यस्थ की नियुक्ति :-
कोई विवाद उपस्थित होने पर आवश्यक समझे तो कार्यसमिति निर्णय के लिये मध्यस्थ की नियुक्ति कर सकेगी। सम्बद्धता प्राप्त किसी संस्था या सदस्य के लिए कानूनी कार्यवाही करने के पूर्व इस नियम का पालन अनिवार्य होगा।
34. भाषा :-
संगठन की भाषा हिन्दी होगी।
35. विसर्जन :-
संगठन का विसर्जन के लिये यदि कोई प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ तो उस पर विचार करने के लिये कार्यकारी मण्डल की विशेष बैठक महासभा की अनुमति से बुलाई जायेगी। यदि उपस्थित सदस्यों के 75 प्रतिशत बहुमत द्वारा विसर्जन का प्रस्ताव स्वीकार किया गया तो उसे क्रियान्वित किया जायेगा।
विसर्जन की दशा में संगठन की समस्त सम्पत्ति अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा को सौंप दी जाएगी। किसी भी स्थिति में संगठन की सम्पत्ति का वितरण व्यक्तिगत रूप से नहीं किया जायेगा।