जिला/आंचलिक माहेश्वरी सभा

जिला/आंचलिक माहेश्वरी सभा
मॉडल विधान

दिनांक 27-28 मई, 2007 को महासभा कार्यसमिति की वृन्दावन बैठक में पारित

अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा
रजत जयन्ती सत्र 2006 -07

पदाधिकारीगण
श्री रामपाल सोनी भीलवाड़ा सभापति
श्री कस्तुरचन्द बोहती चैन्नईचैन्नई महामंत्री
श्री दामोदरदास मूंदडा राजनांदगांव अर्थमंत्री
श्री रामकुमार मर्दा इचलकरंजी संगठन मंत्री
श्री जोधराज लढा कोलकाता उपसभापति (पूर्वांचल)
श्री मदनमोहन तापडिया अलीगढ उपसभापति (उत्तरांचल)
श्री रामगोपाल मूंदडा सूरत उपसभापति (पश्चिमांचल)
श्री शंकरलाल गिलडा गुलबर्गा उपसभापति (दक्षिणांचल)
श्री चम्पालाल राठी बिराटनगर संयुक्तमंत्री (पूर्वांचल)
श्री मदनगोपाल तापडिया कानपुर संयुक्तमंत्री (उत्तरांचल)
श्री अशोक डागा इन्दौर संयुक्तमंत्री (पश्चिमांचल)
श्री बजरंगलाल बियाणी मुम्बई संयुक्तमंत्री (दक्षिणांचल)
श्री देवकरण गग्गड भीलवाड़ा संयुक्तमंत्री (केन्द्रीय कार्यालय)

केन्द्रीय विधान संशोधन समिति
श्री रामनिवास राठी अहमदाबाद संयोजक- पश्चिमांचल संयोजक
श्री अशोक बंग चैन्नईचैन्नई महामंत्री
श्री दामोदरदास मूंदडा नासिक सदस्य संयोजक दक्षिणांचल
श्री रमेश मर्दा मुम्बई सदस्य
श्री रमाशंकर झंवर कलकत्ता सदस्य
श्रीमती मनोरमा लढ़ा ग्वालियर सदस्य
श्री श्रीराम माहेश्वरी वाराणसी सदस्य
श्रीमती लता लाहोटी पुणे सदस्य
श्री अनिल कुमार मानधनिया गौरखपुर सदस्य-संयोजक पूर्वाचल
श्री रामनिवास झंवर फरीदाबाद सदस्य-संयोजक उत्तरांचल

प्रादेशिक सभा का मॉडल विधान (श्रृंखलाबद्ध संगठन पर आधारित)

1 नाम :-
इस संस्था का नाम .......................................................... प्रदेश माहेश्वरी सभा होगा।

2 कार्यक्षेत्र :-
इस संस्था का कार्यक्षेत्र अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा द्वारा निर्देशित प्रदेश सभा के अन्तर्गत प्रादेशिक सभा द्वारा निर्धारित जिला सभा का क्षेत्र होगा। निम्नलिखित राजस्व तहसीले इसका कार्यक्षेत्र होगा।
1....................................... 2 ......................................... 3
4....................................... 5 ......................................... 6 आदि।

3 उद्देश्य :-
जिला माहेश्वरी सभा अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा द्वारा निर्धारित प्रदेश सभा का अंग होने के कारण प्रदेश सभा के उद्देद्गय ही जिला सभा के उद्देश्य होंगे। समस्त जिला वासियों की उन्नति एवं प्रगति के व्यापक दृष्टिकोण के साथ माहेश्वरी समाज के समयानुसार सर्वांगीण उन्नति करना जिससे माहेश्वरी समाज राष्ट्र का एक प्रगतिशील घटक बना रहे | माहेश्वरी समाज के सामाजिक सांस्कृतिक, अध्यात्मिक, नैतिक, शैक्षणिक व्यावसायिक व आर्थिक उन्नति के लिए हर सम्भव प्रयत्न करना। इन कार्यों के लिए आवश्यक संगठन या न्यास आदि स्थापति करना। अपनी मूलभूत संस्कृति व संस्कारो को कायम रखते हुए परिवर्तित परिस्थितियों के अनुुसार समाज को तैयार करना। उपरोक्त उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु विधि सम्मत कार्य करना तथा इनकी पूर्ति हेतु निम्नलिखित एवं इनसे सम्बन्धित समयोचित कार्य करना -

1. समाज के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, नैतिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, व्यावसायिक, शेक्षणिक, शारीरिक उन्नति के लिए प्रयत्न करना। ऐसे कार्यों को साध्य करने के लिए आवश्यक संस्थाओं से सहयोग करना। पत्र, पत्रिकाएं, स्मारिकाएं एवं प्रचार साहित्य का प्रकाशन एवं वितरण करना तथा वैचारिक क्रन्ति द्वारा जगरूक समाज के अनुरूप वातावरण निर्मित करना।

2. रोजगार, व्यवसाय आदि के इच्छुक व्यक्तियों को मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान करना। इस हेतु शिक्षण, प्रशिक्षण, भ्रमण, प्रदर्शन, सेमिनार आदि का आयोजन करना अथवा करवाना। सहकारी संस्थाओं के माध्यम से व्यवसायिक अवसर व आवासीय सुविधाएं बढ़ाना।

3. समाज के अभावग्रस्त लोगों की सहायता करना, छात्रवृत्ति देना एवं दिलाने की व्यवस्था करना।

4. समाज के असहाय, बेरोजगार, अपंग, अस्वस्थ, निराश्रित एवं जरूरतमंद बच्चों, महिलाओं एवं पुरूषों को सहायता करना व सहयोग देना।

5. अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा तथा प्रदेश सभा की योजनाओं एवं कार्यक्रमों को सम्पन्न करने में सहयोग करना व समाज में व्याप्त कुरीतियां को दूर करके स्वस्थ परम्पराओं के विकास का प्रयास करना।

6. अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा तथा प्रदेश सभा द्वारा स्थापित व संचालित संस्थाओं का लाभ माहेश्वरी समाज के साथ ही यथा सम्भव अन्य समाज को भी देना।

7. महासभा एवं प्रादेशिक सभा के उद्देश्यों को अग्रसर करने के लिए सभा, सम्मेलन, अधिवेशन, गोष्ठियां, शिविर, वाद-विवाद, सांस्कृतिक समारोह, प्रदर्शनी, खेल-कूद, व्यायाम, योग, चलचित्र, नाटक आदि विविध प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करना अथवा कराना। बालकों एवं वयस्कों को सुसंस्कारित करने हेतु संस्कार शिविर, वर्ग तथा व्यक्तित्व विकास हेतु विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन करना।

8. निर्धारित कार्यों एवं योजनाओं के लिए धनसंग्रह करना, उसका विनियोग करना। चल अथवा अचल सम्पत्ति प्राप्त करना व धारण करना। इन कार्यों के लिए आवश्यक संगठन अथवा न्यास आदि स्थापित करना, सम्पत्ति सम्बन्धी क्रय, विक्रय, ऋण, बंधक, लीज आदि के अधिकार ग्रहण करना

9. अन्य ऐसे कार्य करना जिससे समाज की उन्नति सम्भव हो।

4 परिभाषाएं :-
इस विधान में उल्लेखित विशिष्ट शब्दों का अर्थ निम्नानुसार समझा जाएगा -

1. 'महासभा' शब्द से तात्पर्य ''अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा'' से है।

2. 'माहेश्वरी ' शब्द से तात्पर्य उन व्यक्तियों से है जो स्वयं को माहेश्वरी कहते हैं और जिन्हें समाज माहेश्वरी मानता है तथा जिनकी खाँप माहेश्वरी जाति की खाँपों में से है।

3. परिवार से आशय है - परिवार व्यक्तियों के उस समूह से है जिनकी भोजन व्यवस्था एक ही रसोई घर (किचन) से संचालित है।

4. समाज, सामाजिक आदि शब्द माहेश्वरी समाज से है।

5. प्रदेश सभा-शब्द का तात्पर्य प्रदेश माहेश्वरी सभा से है।

6. जिला सभा, आंचलिक सभा, तहसील सभा, ग्राम, नगर सभा, क्षेत्रीय सभा आदि शब्दों का अर्थ निर्धारित क्षेत्रों की माहेश्वरी सभाओं से है। महानगरों (दिल्ली, मुम्बई और कोलकता) की आंचलिक सभाएं जिला सभाआकें के समकक्ष होगी।

7. कार्यकारी मण्डल का अर्थ जिला सभा के कार्यकारी मण्डल से है।

8. कार्यसमिति/प्रबन्धसमिति का अर्थ जिला सभा की कार्यसमिति/प्रबन्धकारिणी से है।

9. प्रादेशिक ट्रस्ट का अर्थ प्रदेश माहेश्वरी सभा द्वारा स्थापित ट्रस्ट से है।

10. जिला कोष का अर्थ जिला सभा द्वारा स्थापित ट्रस्ट या कोष से है।

11. प्रथम स्तरीय कार्यकारी मण्डल-श्रृंखलाबद्ध संगठन में सबसे पहली कड़ी ग्राम की होती है। ग्राम, नगर आदि मिलकर तहसील सभा का गठन करते हैं। तहसील सभा प्रथम स्तरीय कार्यकारी मण्डल है। तहसील सभा की कार्यकारी मण्डल के गठन की पद्धति परिष्ठि ''ब'' में दी गई है।

5 कार्यालय :-
जिला सभा कार्यसमिति के निश्चयानुसार स्थान पर जिला सभा का कार्यालय होगा। आवश्यक हो तो जिला सभा कार्यकारी मण्डल स्थायी कार्यालय का निर्माण कर सकेगा एवं वहां की व्यवस्था सम्बन्धी योजना बनायेगा।

6 जिला सभा के अवयव :-
ग्राम सभा, नगर सभा, तहसील सभा तथा जिला संगठन द्वारा स्थापित ट्रस्ट अथवा कोष ।

7 जिला सभा का गठन :-
जिला सभा कार्यकारी मण्डल का गठन निम्न प्रकार के सदस्यों द्वारा होगा :-

1 चयनित सदस्य    2 पदेन सदस्य 3 मनोनीत सदस्य

1 चयनित सदस्य -
(क) जिले में कार्यकारी मण्डल के सदस्यों का चयन तहसील में परिवारों की संख्या के आधार पर किया जायेगा। हर तहसील से कितने सदस्य जिला कार्यकारी मण्डल में चयनित होंगे, उसकी स्पष्ट जानकारी विधान में देना अनिवार्य होगा।

(ख) जिला कार्यकारी मण्डल के लिए चुने जाने वाले सदस्य 30 वर्ष से कम उम्र के नहीं होंगे।

(ग) जिन जिलों में माहेश्वरी परिवार बहुत कम है वहां अनय जिलों को मिलाकर संयुक्त जिलों में भी जोड़कर संयुक्त जिला सभा बनाई जा सकेगी। ऐसे जिलों का वर्गीकरण महासभा/प्रदेश सभा द्वारा अलग से किया जा रहा है।

(घ) तहसील सभा, के अन्तर्गत जो ग्राम सभाएं /स्थानीय सभाएं कार्य कर रही है, उनके कितने माहेश्वरी परिवार संगठन के सदस्य है, उनकों ध्यान में रखते हुए ही उन्हें जिला कार्यकार मण्डल में कोटा आवंटित किया जावेगा।

(ड) महानगरीय प्रादेशिक सभा में भी उनके आंचलिक संगठनों में परिवारों की संख्या एवं सदस्यों की संखया को ध्यान में रखकर कोटा निर्धारित किया जावेगा।

2 पदेन सदस्य -
जिला क्षेत्र में निवास करने वाले निम्न महानुभाव जिला कार्यकारी मण्डल के पदेन सदस्य होंगे।

1. अ.भा. माहेश्वरी महासभा के पदाधिकारी, कार्यसमिति तथा महासभा कार्यकारी मण्डल के सदस्य।

2. अ.भा. माहेश्वरी महासभा, महिला संगठन एवं युवा संगठन के निवर्तमान एवं भूतपूर्व अध्यक्ष एवं महामंत्री।

3. श्री कृष्णदास जाजू स्मारक ट्रस्ट के वर्तमान ट्रस्टी अथवा प्रदेश के संयोजक।

4. प्रादेशिक ट्रस्ट के ट्रस्टीगण (प्रबन्धकारिण के सदस्य)।

5. प्रदेश सभा के पदाधिकारी तथा प्रदेश सभा कार्यसमिति के सदस्य।

6. अ.भा. माहेश्वरी तथा प्रादेशिक महिला एवं युवा संगठन के सदस्य।

7. श्री आदित्य विक्रम बिड़ला मेमोरियल व्यापार सहयोग केन्द्र एवं श्री रामगोपाल माहेश्वरी स्मृति शिक्षा केन्द्र की प्रबन्ध समिति के सदस्य।

8. अ.भा. माहेश्वरी महासभा द्वारा स्थापित अन्य ट्रस्टों के ट्रस्टी।

9. जिला ट्रस्ट के ट्रस्टीकण (जिला ट्रस्ट की प्रबन्धकारिणी अथवा न्यायी मण्डल के पदाधिकारी एवं सदस्यगण)।

10. तहसील अथवा समकक्ष सभाओं के अध्यक्ष एवं मंत्री।

11. जिला महिला एवं युवा संगठन के अध्यक्ष एवं मंत्री।

3 मनोनीत सदस्य
जिलाध्यक्ष जिले के कार्यकारी मण्डल में पांच सदस्य मनोनीत कर सकेंगे।

8 (1) जिला सभा कार्यकारी मण्डल के गठन का आधार :-

(अ) जहां परिवारों की संखया पूरे जिले में 100 से 500 तक है वहां जिला कार्यकारी मण्डल में तहसील, नगर, स्थानीय पंचायत, ग्राम सभा आदि से अधिकतम 51 सदस्य चयनित होकर आयेंगे।

(आ) जहां परिवारों की संखया पूरे जिले में 501 से 1000 तक है वहां जिला कार्यकारी मण्डल में तहसील, नगर, स्थानीय पंचायत, ग्राम सभा आदि से अधिकतम 71 सदस्य चयनित होकर आयेंगे।
(इ) जहां परिवारों की संखया पूरे जिले में 10001से 2000तक है वहां जिला कार्यकारी मण्डल में तहसील, नगर, स्थानीय पंचायत, ग्राम सभा आदि से अधिकतम 101सदस्य चयनित होकर आयेंगे।

(ई) जहां परिवारों की संखया पूरे जिले में 2000से अधिक है वहां जिला कार्यकारी मण्डल में तहसील, नगर, स्थानीय पंचायत, ग्राम सभा आदि से अधिकतम 151 सदस्य चयनित होकर आयेंगे।

(उ) किसी जिला सभा क्षेत्र की एक तहसील में सदस्य परिवारों की संखया 50 प्रतिशत से 60 प्रतिशत होने पर वहां कार्यकारी मण्डल में सीटों का आवंटन 30-40 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।

नोट - कार्यकारी मण्डल में चयनित होने वाले सदस्यों की संख्या 151 से अधिक नहीं होगी। जिला सभा गठन के लिए कम से कम 50 परिवार होना आवश्यक है, जहां पर 50 परिवार नहीं है वहां पर दो जिले अथवा उससे अधिक जिलों या पास के जिला सभा के साथ मिलाकर संयुक्त जिला संगठन का गठन किया जा सकेगा और उपरोक्तानुसार कार्यकारी मण्डल के सदस्यों का चयन किया जावेगा। जहां पर कई जिलों को मिलाकर अथवा पास के जिला संगठन के साथ जोड़कर जिला संगठन का गठन नहीं हो सकता वहो सभी परिवार मिलकर जिला कार्यसमिति सदस्यों व पदाधिकारियों का चुनाव करेंगे।

(2) तहसील सभा के लिए कम से कम 25 परिवारों का होना आवश्यक होगा।

(3) जहां नगर/ग्राम में 1000 से अधिक परिवार है वहां नगरीय तहसील सभा का गठन जिला सभा द्वारा उस नगर को विभिन्न क्षेत्रों में विभाजित करके प्रतयेक क्षेत्र में परिवारों के सदस्यों की संख्यानुसार किया जावेगा। ऐसे शहर जिनकी आबादी एवं क्षेत्रफल विस्तृत है, वहां 500 परिवार नगरीय तहसील सभा का गठन किया जावेगा तथा वहां की क्षेत्रीय सभाएं नगर सभा के समान होगी।

(4) कलकत्ता, दिल्ली व मुम्बई महानगर, जिन्हें प्रदेश सभा का दर्जा प्राप्त है, वहां जिला सभाओं के सभी दायित्व उन महानगरों की आंचलिक सभाये पूरा करेगी।

(5) जहां परिवारों की संख्या कम होने के कारण तहसील सभा/नगरीय तहसील सभा का गठन होना सम्भव नहीं है, वहां स्थानीय सभा, जिला सभा के अन्तर्गत सीधे कार्य करेगी व स्थानीय सभा के एरिया में रहने वाले परिवार स्थानीय सभा के सदस्य होंगे। जहां स्थानीय सभा का गठन होना सम्भव नहीं हो, वहां उस जिले में रहने वाले सभी माहेश्वरी परिवार उस जिला सभा के सदस्य बन सकेंगे और उस जिला सभा के लिए आवश्यक होगा कि उसके जिले में रहने वाले माहेश्वरी परिवारों में से कम से कम 75 प्रतिशत उनके सदस्य बने।

(6) प्रत्येक परिवार को एक इकाई माना गया है इसलिए सदस्यता एक परिवार में एक व्यक्ति को ही दी जायेगी। यदि परिवार की कोई महिला वर्षों से मुख्य संगठन में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई है तो उस महिला को भी विशेष परिस्थिति में स्थानीय सभा का सदस्य बनाया जा सकेगा।

(7) तहसील सभा/नगर सभा को भी अपनी सभा का विधान जिला सभा के दिशा-निर्देश में जिला सभा के विधान की भावना को ध्यान में रखकर बनाना आवश्यक होगा एवं उसे जिला सभा से अनुमोदित कराना होगा। विधान अनुमोदित नहीं होने तक जिला सभा के विधानानुसार ही कार्य/चुनाव होंगे।

(8) प्रत्येक जिला सभा को प्रदेश कार्यसमिति द्वारा निर्धारित सत्र सम्बद्धता शुल्क प्रदान कर प्रदेश सभा से सम्बद्धता लेना आवश्यक होगा।

(9) जहां जिला सभाएं पूर्व से ही पंजीकृत संस्था के रूप में कार्यरत है, उन्हें प्रदेश सभा एवं महासभा से सम्बद्धता हेतु अपने विधान में महासभा द्वारा पारित मॉडल विधान के अनुसार अपने विधान को परिवर्तित एवं परिवद्धित करना होगां

(10) मॉडल विधान के अनुसार गठित जिला सभाएं भी अगर स्वयं को पंजीकृत करा लेती है तो भी महासभा द्वारा समयानुसार मॉडल विधान में किये गये संशोधन पंजीकृत जिला संगठनों के विधान में स्वतः ही मान्य होंगे।

(11) गठन के लिए अन्य नियम एवं उपनियम संलग्न परिशिष्ट ''अ'' के अनुसार होंगे।

9 जिला कार्यकारी मण्डल के दायित्व एवं अधिकार -
1. संगठन के उद्देश्यों को पूरा करने एवं महासभा तथा प्रदेश सभा द्वारा निर्देशित तथा जिला सभा में पारित प्रस्तावों के क्रियान्वयन का दायित्व जिला कार्यकारी मण्डल का होगा।

2. जिला सभा कार्यसमिति के पदाधिकारियों तथा सदस्यों का चुनाव करने का अधिकार जिला सभा कार्यकारी मण्डल को होगा। उपरोक्त चुनाव हेतु चुनाव अधिकारी की नियुक्ति जिला कार्यसमिति करेगी। ।

3. जिला कार्यकारी मण्डल जिले के तहसील, नगर अथवा ग्राम सभा आदि जैसी भी स्थिति हो को जिला कार्यकारी मण्डल में उनकी सदस्य संख्या के अनुपात में कार्यसमिति की सीटे आवंटित कर सकेगा।

4. कार्यकारी मण्डल के सदस्यों को कार्यसमिति द्वारा निर्धारित शुल्क देना होगा।

5. कार्यकारी मण्डल के जो सदस्य बिना सूचना दिये लगातार कार्यकारी मण्डल की तीन बैठकों में अनुपस्थित रहेंगे, उनका स्थान रिक्त घोषित किया जा सकेगा।

6. जिला सभा की नीति एवं प्रस्तावों का पालन करने का दायित्व प्रत्येक सदस्य का होगा।

7. जिला सभा के विधान में संशोधन, परिवर्तन परिवर्द्धन (आगे दिये प्रावधानों के अनुसार करने का अधिकारी जिला कार्यकारी मण्डल को होगा)।

10 कार्यकारी मण्डल की बैठकें :-
(क) साधारण बैठक -
कार्यकारी मण्डल की साधारण बैठक चुनावी बैठक के अलावा वर्ष में कम से कम दो बार होगी। दो बैठकों के बीच का अन्तराल 8 माह से अधिक का नहीं होगा। प्रत्येक वर्ष समाप्ति के 3 माह बाद की बैठक में जिला सभा का हिसाब प्रस्तुत किया जायेगा तथा आवश्यक विषयों परविचार विनिमय एवं निर्णय किया जायेगा।

(ख) विशेष बैठक -
आवश्यकतानुसार जिला सभा के अध्यक्ष एवं मंत्री आपसी परामर्श करके कार्यकारी मण्डल की विशेष बैठक का आयोजन कर सकेंगे।

(ग) अधियाचित बैठक -
कार्यकारी मण्डल के 1/3 सदस्य अथवा 30 सदस्य किसी विशेष कार्य के लिए अधियाचित बैठक बुलाने के लिए लिखित आवेदन जिला सभा के मंत्री या अध्यक्ष को कर सकते हैं। आवेदन पत्र प्राप्त होने पर एक माह के अन्दर बैठक का आयोजन करना आवश्यक माना जायेगा। यदि एक माह में बैठक नहीं बुलाई जाती है तो नियमानुसार एजेण्डा भेजकर आवेदकों में से पांच सदस्य अगले 15 दिन में बैठक बुला सकेंगे। इस बैठक का एजेण्डा प्रमाणित डाक से भेजना आवश्यक होगा। इस बैठक में एजेण्डा में उल्लेखित विषयों के अतिरिक्त अन्य किसी विषय पर निर्णय नहीं लिये जा सकेंगे। इस बैठक की अध्यक्षता जिला कार्यसमिति के किसी पदाधिकारी या वरिष्ठ सदस्य द्वारा की जावेगी तथा कोरम पूर्ति के अभाव में बैठक निरस्त मानी जायेगी।

11 (क) कार्यसमिति का गठन :-
जिला सभा के कार्य को सुगमता से चलाने के लिए जिला कार्यकार मंडल के सदस्यों द्वारा कार्यकारी मण्डल सदस्यों में से कार्यसमिति का गठन किया जायेगा। पदाधिकारियों सहित कार्यसमिति के चयनित/निर्वाचित सदस्यों की संख्या न्यूनतम 18 एवं अधिकतम 26 होगी। इसका गठन निम्न प्रकार से होगा -

(अ) धारा 12 (क) के अनुसार पदाधिकारी - न्यूनतम 6 एवं अधिकतम 10

(आ) ग्राम, नगर अथवा तहसील से सदस्य - न्यूनतम 12 एवं अधिकतम 16

(इ) पदेन सदस्य - उपरोक्त धारा 11 (क) में वर्णित सदस्यों के अतिरिक्त निम्नलिखित सदस्य जिला कार्यसमिति के पदेन सदस्य होंगे -

1. अ.भा. माहेश्वरी महासभा के जिले में निवास करने वाले पदाधिकारी एवं कार्यसमिति के सदस्य।

2. अ.भा. माहेश्वरी महासभा के जिले में निवास करने वाले निवर्तमान एवं पूर्व सभापति एंव महामंत्री।

3. प्रदेश सभा के जिले में निवास करने वाले पदाधिकारी।

4. तहसील सभाओं के अध्यक्ष एवं मंत्री।

5. जिला सभा के निवर्तमान अध्यक्ष एवं मंत्री।

(ई) मनोनीत सदस्य -
जिला अध्यक्ष को वर्तमान कार्यकारी मण्डल में से कार्यसमिति हेतु न्यूनतम दो सदस्य तथा 100 कार्यकारी मण्डल सदस्य होने पर तीन एवं 150 से अधिक होने पर पांच सदस्यों को मनोनीत करने का अधिकार होगा।

(ख) कार्यसमिति के दायित्व एवं अधिकारी -
1. जिला सभा के कार्यों को सुगमता से चलाने तथा उद्देश्यों को अग्रसर करने हेतु विभिन्न समितियों, उपसमितियों तथा प्रकोष्ठों का गठन करना, विभिन्न प्रयोजनार्थ नियम एवं उपनियम बनाना, चुनाव सम्बन्धी नियम बनाना, चुनाव अधिकारी की नियुक्ति करना तथा चुनाव कार्यक्रम बनाना।

2. तहसील सभाओं तथा ग्राम/नगर सभाओं का विधान अनुमोदित करना तथा तहसील सभाओं को सम्बद्धता प्रदान करने हेतु सम्बद्धता शुल्क निर्धारित करना, नियम बनाना एवं सम्बऋता प्रमाण पत्र प्रदान करना।

3. जिला सभा की सत्र एवं वर्ष वार योजना एवं कार्यक्रमों को स्वीकार करना, उनके लिए बजट स्वीकार करना तथा कार्यक्रम एवं योजना क्रियान्विति का सतत्‌ मूल्यांकन करना।

4. कार्यकारी मण्डल सदस्यों, कार्यसमिति सदस्यों तथा पदाधिकारियों का सत्र शुल्क निर्धारण करना।

5. प्रदेश सभा कार्यकारी मण्डल एवं महासभा कार्यकारी मण्डल हेतु निर्धारित संखया में सदस्यों का चयन सर्वसम्मति से करना। सर्वसम्मति के अभाव में जिला कार्यकारी मण्डल द्वारा सदस्यों का चयन कराना।

6. विभिन्न माध्यमों से जिला सभा हेतु वित्त पूर्ति करना।

7. जिला कार्यकारी मण्डल के प्रति पूर्ण उत्तरदायी रहना।

8. महासभा एवं प्रादेशिक सभा से प्राप्त निर्देशों, कार्यक्रमों एवं योजनाओ को पूरा करना।

9. जिला सभा के सत्र मध्य रिक्त हुए अध्यक्ष के अलावा अन्य पदों तथा कार्यसमिति सदस्यों के स्थानों को शेष अवधि के लिए भरना।

10. स्थानीय सभा के सदसयों का सदस्यता शुल्क निर्धारित करना तथा तहसील सभा कार्यकारी मण्डल सदस्यों एवं तहसील कार्यसमिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों का सत्र शुल्क निर्धारित करना।

11. कार्यसमिति की तीन बैठकों में लगातार अनुपस्थित रहने पर सदस्य की पदधारिता/ सदस्यता कार्यसमिति से समाप्त की जा सकेगी।

12. तहसील कार्यसमिति में एक सदस्य का मनोनयन तहसील कार्यकारी मण्डल के सदस्यों में से करना।

13. जिला कार्यसमिति में आवद्गयक होने पर तहसीलवार सीटों की संखया का निर्धारण उचित प्रतिनिधित्व के आधार पर करना।

(ग) कार्यसमिति की बैठकें -
जिला कार्यसमिति की वर्ष में कम से कम तीन बैठकें अवश्य होगी। यथा सम्भव इन बैठकों का आयोजन विभिन्न तहसीलों में किया जावेगा।

12 (क) पदाधिकारी :-
पदाधिकारियों का चुनाव जिला कार्यकारी मण्डल के सदस्यों में से ही कार्यकारी मण्डल द्वारा होगा। कोई भी पदाधिकारी एक पद पर लगातार दो कार्यकाल से अधिक समय तक नहीं रहेगा।
अध्यक्ष - 1
उपाध्यक्ष - 1 से 3 तक
मंत्री - 1
संयुक्त मंत्री - 1 से 3 तक
अर्थमंत्री एक - 1
संगठन मंत्री - 1 या 2 (आवश्यकतानुसार)
नोट - जिन जिला सभाओं में पूर्व से ही वरिष्ठ उपाध्यक्ष के पद का प्रावधान है, उसे सतत्‌ रूप से रखा जा सकेगा।

(ख) पदाधिकारियो की अहर्ताएं निम्नानुसार होगी -
(अ) अध्यक्ष -
1. न्यूनतम आयु 35 वर्ष।
2. पूर्व के किन्ही 3 सत्रों की बैठकों में कम से कम 60 प्रतिशत उपस्थिति रही हो।
3. पूर्व के 1 सत्र की बैठकों में कम से कम 60 प्रतिशत उपस्थिति रही हो।

(अ) मंत्री -
1. न्यूनतम आयु 35 वर्ष हो।
2. पूर्व के किसी एक सत्र में जिला कार्यकारी मण्डल का सदस्य रहा हो।
3. पूर्व के किसी १ सत्र की बैठक में कम से कम 60 प्रतिशत उपस्थिति रही हो।
नोट - जहां प्रथम बार जिला सभाओं का गठन किया जा रहा है, वहां उपरोक्त अहर्ताएं लागू नहीं होगी।

(ग) पदाधिकारियो के उत्तदायित्व एवं अधिकार -
(अ) अध्यक्ष -
1. जिला सभा की सभी बैठकों की अध्यक्षता करेंगे।
2. विभिन्न पदाधिकारियों तथा सदस्यों को कार्य वितरण करेंगे तथा जिला सभा के कार्य संचालन में उत्तरदायी होंगे। सभा को गतिशील रखने में तथा उद्देश्य पूर्ति हेतु प्रयास करेंगे।
3. जिला सभा का संगठन सुदृढ़ करने हेतु भ्रमण करेंगे। आवश्यकतानुसार जिला सम्मेलन का आयोजन करेंगे।
4. तहसील सभाओं को मार्गदर्शन करेंगे तथा तहसील की बैठकों में जिला प्रतिनिधि को भेजेंगे।
5. विभिन्न प्रकोष्ठ प्रभारियों की नियुक्ति व उनके माध्यम से संगठन के उद्देश्य की प्राप्ति के प्रयास करेंगे।

(आ) उपाध्यक्ष -
अध्यक्ष की अनुपस्थिति में संगठनात्मक वरिष्ठता के आधार पर बैठकों की अध्यक्षता करेंगे। सभा के कार्य संचालन में अध्यक्ष को सहयोग देंगे। सौंपे गए कार्य पूरा कराने की जिम्मेदारी निभायेंगे।

(इ) मंत्री -
जिला सभा कार्यालय का संचालन करेंगे। कार्यकारी मण्डल तथा कार्यसमिति की बैठकों की कार्यवाही रखेंगे। जिला सभा सम्बन्धी कर्मचारियों की नियुक्ति करेंगे। कार्यकारी मण्डल तथा कार्यसमिति के निर्णयानुसार सभा का कार्य करेंगे। स्वीकृत बजट के अनुसार खर्च करेंगे। अन्य पदाधिकारियों के कार्यों में सहयोग कर कार्य सम्पन्न कराने की व्यवस्था करेंगे। महासभा तथा प्रदेश सभा के द्वारा निर्देशित कार्यों को सम्पन्न कराने की व्यवसायी करेंगे। तहसील सभाओं से सम्पर्क कर उनकी गतिविधियों की जानकारी प्राप्त करेंगे। ग्राम एवं तहसील स्तर से सूचनाएं एकत्रित करेंगे तथा तहसील सभाओं की योजना एवं कार्यों का मार्गदर्शन एवं मूल्यांकन करेंगे। जिला सभा की वार्षिक एवं सत्रकालीन योजना बना उसे जिला कार्यसमिति एवं कार्यकारी मण्डल से अनुमोदित करायेंगे। प्रदेश सभा से सम्बद्धता की कार्यवाही निष्पादित करेंगे। जिला अध्यक्ष की अनुमति से बैठके बुलायेंगे।

(ई) संयुक्तमंत्री -
सभा के संगठन को सुदृढ़ करने में मंत्री को सहयोग देंगे। कार्य विभाजन द्वारा सौंपे हुए कार्य को सम्पन्न करेंगे।

(उ) मंत्री -
सभा के आय-व्यय का हिसाब रखेंगे। शुल्क, चन्दा एवं सहयोग राशि प्राप्त करेंगे। मंत्री के सहयोग से बजट बनायेंगे, स्वीकृत बजट के अनुसार मंत्री के अनुमोदन से खर्च करेंगे एवं हिसाब अंकेक्षित करायेंगे। कार्यकारी मण्डल की वर्ष समाप्ति के पश्चात होने वाली प्रथम बैठक में आय व्यय लेखों का अनुमोदन करायेंगे।

(ऊ) संगठन मंत्री -
श्रृंखलाबद्ध संगठन को सक्रिय रखेंगे। भ्रमण, प्रचार आदि द्वारा संगठन को सुदृढ बनायेंगे। अध्यक्ष एवं कार्यसमिति के निर्देशानुसार विविध संगठनात्मक कार्य सम्पादित करेंगे।

13 (1) गणपूर्ति :-
(अ) कार्यकारी मण्डल सदस्यों की बैठकों की गणपूर्ति हेतु 1/3 सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। गणपूर्ति के अभाव में स्थगित बैठक नियत समय के 1/2 घन्टे बाद हो सकेगी। उस बैठक में विषय पत्रिका में जो विषय रखे गए है उन पर ही निर्णय लिये जायेंगे। कार्यकारी मण्डल की विषय पत्रिका 15 दिन पहले डाक, कोरियर, ई-मेल अथवा अन्य साधन द्वारा भेजना आवश्यक होगा।

(आ) कार्यसमिति अन्य विषय पत्रिका डाक, कोरियर या ई.-मेल द्वारा १० दिन पहले भेजना आवश्यक होगा। कार्यसमिति की बैठकों की गणपूर्ति हेतु 1/3 सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होगी, जिसमें तीन पदाधिकारी आवश्यक होंगे।

(2) मतगणना -
चुनाव के अतिरिक्त अन्य विषयों में समान मत प्राप्त होने पर अध्यक्ष को एक अतिरिक्त मत देने का अधिकार रहेगा। सभी विषयों में हाथ उठाकर मतदान होगा। निर्णय बहुमत से होगा। कार्यकारी मण्डल द्वारा पदाधिकारियों के चुनावों के वक्त चुनाव अधिकारी मत पत्रों द्वारा चुनाव करा सकेंगे। चुनाव में समान मत प्राप्त होने पर चिट्‌ठी निकाल कर निर्णय लिया जायेगा।

14 कार्यकाल :-
सामान्यतः कार्यकारी मण्डल, कार्यसमिति तथा पदाधिकारियों का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। यह कार्यकाल साधारणतः अ.भा. माहेश्वरी महासभा के सत्र कार्यकाल से संलग्न होगा। जिला सभा तथा तहसील सभा के चुनाव प्रदेश सभा द्वारा निर्देशित कार्यक्रम के अनुसार चुनाव समिति द्वारा अधिघोषित एवं सम्पन्न होगा।

नोट - विशेष परिस्थिति में कार्यसमिति जिला सभा का कार्यकाल एक वर्ष तक बढ़ा सकेगी, इसके लिए प्रादेशिक सभा की सहमति लेना आवश्यक होगा।

15 (1) लेखा वर्ष :-
जिला सभा का लेखा वर्ष 1 अप्रेल से 31 मार्च होगा।

(2) जिला सभा का कोष एवं हिसाब -
(अ) जिला सभा अपना कार्य सुचारू रूप से चलाने के लिए शुल्क दान विज्ञापन स्मारिका अनुदान आदि अनेकविध साधनों से कोष एकत्रित कर सकेगी।

(आ) कार्यसमिति आवश्यकतानुसार स्थाई निधि का निर्माण कर सकेगी।

(इ) जिला सभा के नाम से बैंक में खाता खोला जायेगा जिस पर सभा के निम्न पदाधिकारियों को हस्ताक्षर करने के अधिकार होंगे। 1. अध्यक्ष अथवा मंत्री, 2. अर्थमंत्री इन्हीं दो पदाधिकारियों के हस्ताक्षर से खाता संचालित किया जावेगा। बैंक से सम्बन्धित पत्र व्यवहार का कार्य मंत्री करेंगे।

(ई) हिसाब परीक्षण के लिए आवश्यक व्यवस्था का निर्धारण कार्यसमिति करेगी।

(उ) कार्यसमिति एवं कार्यकारी मण्डल की सभा में गतवर्ष का हिसाब लेखा वर्ष की समाप्ति के 3 माह के भीतर प्रस्तुत कर अनुमोदित कराना होगा व आगामी वर्ष का बजट प्रस्तुत करना होगा।

16 विधान संशोधन :-
जिला सभा के विधान संशोधन का प्रस्ताव कार्यसमिति में पेश होगा, उसमें उपस्थित सदस्यों के 3/4 का समर्थन आवश्यक होगा इस प्रस्ताव को जिला कार्यकारी मण्डल में पेश किया जावेगा। विधान संशोधन क लिए कार्यकारी मण्डल के उपस्थित सदस्यों के 3/4 मतों की आवश्यकता होगी। उपरोक्ता बैठक में सम्पूर्ण कायकारी मण्डल के 50 प्रतिशत सदस्यों की उपस्थिति आवश्यक होगी। विशेष सूचना 20 दिन पूर्व देकर इस प्रकार की बैठक बुलाई जायेगी, जिसमें प्रस्तावित संशोधन का प्रारूप डाक से प्रेषित करना होगा। परिवर्तित विधान प्रदेश सभा की कार्यसमिति द्वारा अनुमोदित होने पर ही प्रभावी हो सकेगा। किसी भी परिस्थिति में मॉडल विधान की मूल भावना में कोई परिवर्तन नहीं किया जावेगा।

17 आचार संहिता :-
महासभा एवं प्रदेश सभा द्वारा स्वीकृत आचार संहिता का प्रत्येक सदस्य एवं संस्था पालन करेगी। जिला सभा अपनी पूरक आचार संहिता कार्यकारी मण्डल की बैठक में प्रस्तुत कर स्वीकृत कर सकती है। स्वीकृत की गई आचार संहिता का पालन करना हर सदस्य तथा पदाधिकारी के लिए अनिवार्य होगा।

18 विवादों का निपटारा :-
स्थानीय तहसील सभा तथा जिला सभा से सम्बन्धित विवाद जिला कार्यसमिति द्वारा नियुक्त तीन सदस्यीय विवावद निवारण समिति द्वारा निपटाये जायेंगे, जिसकी प्रथम अपील जिला कार्यसमिति में तथा उस निर्णय की अपील प्रादेशिक कार्यसमिति को की जा सकेगी। प्रादेशिक कार्यसमिति अथवा उसके द्वारा नियुक्त वाद-विवाद निवारण समिति उस वाद का निर्णय करेगी। यदि कोई पक्ष उस निर्णय से असन्तुष्ट है तो उस विवाद की अपील प्रादेशिक कार्यकारी मण्डल को करेगा तथा प्रादेशिक कार्यकारी मण्डल का निर्णय अन्तिमरूप से मान्य होगा। विशेष परिस्थिति में ही जिला सभा से सम्बन्धित विवाद की महासभा को अपील की जा सकेगी। विवाद अनिवार्यतः संगठन के अन्तर्गत ही निर्णीत होंगे। न्यायालय में जाना अनुशासनहीनता माना जावेगा।

19 (1) पदमुक्ति :-
निम्न कारणों से व्यक्ति की सदस्यता तथा पदधारिता समाप्त हो सकेगी -
1. पागलपन से।
2. त्याग मंजूरी से।
3. मृत्यु से।
4. पदेन सदस्य के पद का कार्यकाल समाप्त होने पर।
5. न्यायालय द्वारा नैतिक अपराध में दण्डित होने के उपरान्त कार्यकारी मण्डल द्वारा पदमुक्ति का निर्णय होने पर।
6. कार्यकारी मण्डल/कार्यसमिति की तीन बैठकों में लगातार अनुपस्थित रहने पर।
(2) रिक्त पद की पूर्ति :-
(अ) सत्र के मध्य में कार्यसमिति अध्यक्ष के अतिरिक्त अन्य पद की पूर्ति कर सकेगी।
(आ) अध्यक्ष पद यदि रिक्त हो तो उस पद की पूर्ति चुनाव विधि से कार्यकारी मण्डल द्वारा की जावेगी जो शेष अवधि के लिए होगी।

20 तहसील सभा/शहरी क्षेत्रीय तहसील सभा के चुनाव जिला सभा के चुनावों से एक माह पूर्व पूरे कराने होंगे। इसी तरह जिला सभा के चुनाव प्रदेश सभा के चुनावों के एक माह पूर्व कराने आवश्यक होंगे।

21 किसी कारण चुनाव समय पर नहीं कराने पर सम्बद्धता प्रदान करने वाली सभा हस्तक्षेप कर चुनाव सम्पादित करा सकेगी।

22 कानूनी कार्यवाही :-
जिला सभा के कोष, सम्पति अथवा हिसाब आदि के सम्बन्ध में आवश्यकतानुसार कानूनी कार्यवाही मंत्री द्वारा उनके नाम से की जायेगी और इस सम्बन्ध में उन्हें योग्य अधिकार प्राप्त होंगे।

23. भाषा :-
सभा की कार्यवाही तथा कामकाज साधारणतः हिन्दी भाषा में होगा। कार्यवृत हिन्दी भाषा में देवनागरी लिपि में लिखा जायेगा।

24 विसर्जन :-
सभा के विसर्जन का प्रस्ताव यदि जिला कार्यकारी मण्डल में प्राप्त हुआ और पारित हुआ तो अन्यत्र कार्यकारी मण्डल की नियमानुसार बैठक बुलाई जायेगी। सभा उपस्थित सदस्यों के 90 प्रतिशत सदस्यों द्वारा विसर्जन प्रस्ताव स्वीकृत किया गया तो उसे क्रियान्वित किया जायेगा। विसर्जन की प्रक्रिया में जिला सभा की समस्त सम्पत्ति लेख, अभिलेख, प्रपत्र कागजात आदि का हस्तान्तरण प्रादेशिक सभा या उसके द्वारा निर्देशित संस्था को किया जायेगा।

परिशष्ठ ''अ''
जिला सभाओं के गठन सम्बन्धी अन्य नियम

1.महासभा द्वारा जिला सभाओं के लिए स्वीकृत विधान के अनुरूप ही जिला सभा अपना संविधान, नियम एवं उपनियम बनायेगी तथा उसे प्रादेशिक सभा से अनुमोदित कराना आवश्यक होगा।

2.प्रत्येक जिला सभा के कार्य क्षेत्र का सीमांकन निर्धारण प्रादेशिक सभा कार्यसमिति द्वारा महासभा के दिशा-निर्देशानुसार किया जावेगा।

3. युवा एवं महिला संगठन के पदेन सदस्यों के अलावा अन्य युवा एवं महिलाएं जिला कार्यकारी मण्डल के सदस्य नहीं होंगे। केवल विशेष परिस्थिति में पूर्व से ही संगठन में सक्रिय रूप से कार्यरत महिला को परिवार से एक और सदस्य बनाया जा सकेगा।

4. जिला सभा कार्यकारी मण्डल सदस्यों की अन्तिम सूची का प्रकाशन सभी आपत्तियों के निवारण के पश्चात चुनाव की तिथि से 30 दिन पूर्व किया जावेगा।

5. जिला कार्यसमिति के चुनाव प्रदेश सभा द्वारा भेजे गए पर्यवक्षकों की देखरेख में होंगे। जिन जिला सभाओं में 2000 से अधिक परिवार निवास करते हैं वहां प्रदेश पर्यवेक्षकों के अलावा महासभा द्वारा भी आवश्यक होने पर पर्यवेक्षक भेजा जावेगा।

6. जिला मंत्री/चुनाव अधिकारी से अपेक्षा है कि वे कार्यकारी मण्डल सदस्यों की सूची मय पते व टेलिफोन नम्बर तथा चुनाव कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी चुनावों की तिथि से एक माह पूर्व प्रदेश मंत्री एवं 2000 से अधिक परिवार होने पर ही महासभा को भेजे। उस सूची पर जिलाध्यक्ष एवं जिला मंत्री के प्रत्येक पृष्ठ पर हस्ताक्षर आवश्यक है।

7. अधिकृत मतदाता सूची प्रतिपृष्ठ दो रूपया लेकर मांगने पर मतदाताओं को उपलब्ध कराई जावेगी।

8. चुनाव सम्बन्धी नियमोपनियम जिला कार्यसमिति द्वारा स्वीकृत किय जायेंगे जो मान्य चुनाव आचार संहिता एवं नियमों के अनुसार होंगे।

9. चुनाव सम्पन्न होने पर उसका प्रतिवेदन चुनाव अधिकारी एवं पर्यवेक्षकों के हस्ताक्षर से प्रदेश सभा को भेजा जावेगा।

10. जिला सभा कार्यकारी मण्डल के गठन के सम्बन्ध में परिशिष्ट ''बी-- एवं विधान की धारा 8 (1) के अनुसार कार्यवाही करना आवश्यक है।

परिशष्ठ ''ब''
जिला सभाओं के अन्तर्गत तहसील सभाओं के गठन के आधार

1. प्रत्येक ग्राम/नगर, जिसमें न्यूनतम 10 परिवार निवास करते हो, वहा स्थानीय सभा का गठन किया जावेगा। स्थानीय सभा अपने सदस्यों में से वांछित संखया में तहसील कार्यकारी मण्डल हेतु सदस्यों का चयन करेगी। चुनाव में स्थानीय सभा के न्यूनतम 50 प्रतिशत सदस्यों की उपस्थिति आवश्यक होगी।

2. ग्राम/नगर या स्थानीय सभा प्रति परिवार जिला कार्यसमिति द्वारा निर्धारित सदस्यता शुल्क लेगी। स्थानीय/ग्राम सभा की सदस्यता हेतु सम्बन्धित परिवार के मुखिया अथवा उनके द्वारा नामित व्यक्ति से सदस्यता आवेदन पत्र भराया जावेगा। महिला एवं युवा संगठन का सदस्य स्थानीय/ग्राम सभा का सदस्य नहीं बन सकेगा। स्थानीय सभा को अपने क्षेत्र में रहने वाले माहेश्वरी परिवारों में से कम से कम 60 प्रतिशत परिवारों को सदस्य बनाना आवश्यक होगा। यदि कोई महिला पूर्व में ही मुखय संगठन में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हो तो उसे विशेष परिस्थिति में स्थानीय सभा की सदस्यता दी जा सकेगी।

3. जिस नगर में एक हजार से अधिक परिवार निवास करते हैं वहां सुविधानुसार क्षेत्रीय सभाओं का गठन किया जावेगा। ऐसी सभी क्षेत्रीय सभा को नगर सभा से सम्बद्धता प्राप्त करनी होगी। इसी प्रकार ऐसे शहर जिनका क्षेत्रफल विस्तृत है किन्तु परिवारों की संखया 500 से 1000 के बीच है वहां भी नगरीय तहसील सभा का गठन किया जावेगा। वहां की क्षेत्रीय सभाएं ग्राम/नगर सभा के समान ही होगी।

4 . प्रत्येक तहसील में कार्यकारी मण्डल के चयनित सदस्यों की संखया निम्न प्रकार से होगी :-

(अ) तहसील क्षेत्र में 25 परिवारों के कम होने पर सभी परिवारों के मुखिया अथवा उनके द्वारा नामित सदस्यों का कार्यकारी मण्डल होगा।

(ब) 26 से 100 परिवारों पर कार्यकारी मण्डल सदस्यों की संख्या अधिकतम 31 होगी।

(स) 101 से 500 परिवारों पर कार्यकारी मण्डल सदस्यों की संखया अधिकतम 51 होगी।

(द) 500 से अधिक परिवार होने पर कार्यकारी मण्डल सदस्यों की संखया अधिकतम 101 होगी।

5. तहसील संगठनो के क्षेत्र में निवास कर रहे नीचे लिखी श्रेणियों में आने वाले सदस्य तहसील कार्यकारी मण्डल पर पदेन सदस्य होंगे। इन्हें वे सभी अधिकार प्राप्त होंगे जो चयनित सदस्यों को प्राप्त है।

(क) जिला संगठन के विधान की धारा 7 (2) में वर्णित सभी पदेन सदस्य।

(ख) तहसील सभा के निवर्तमान अध्यक्ष व मंत्री।
नोट - उपरोक्त सभी सदस्य तहसील की कार्यसमिति में कोई पद ग्रहण नहीं करेंगे।

6. ऊपर (4) व (5) में वर्णित लिए गए सदस्यों की सभा तहसील सभा कार्यकारी मण्डल कहलावेगी। ये सभी मिलकर तहसील कार्यसमिति हेतु एक अध्यक्ष एवं 11 सदस्य चुनेंगे। इनके अलावा अध्यक्ष द्वारा दो तथा जिला कार्यसमिति द्वारा एक सदस्य का मनोनयन किया जावेगा।

7. ऊपर (6) के अनुसार चुने गए अध्यक्ष व सदस्य अपने में से नीचे लिखे अनुसार पदाधिकारी चुनेंगे -

1 उपाध्यक्ष- एक 2 मंत्री-एक

3 सहमंत्री-एक 4 कोषाध्यक्ष-एक

5 संगठन मंत्री-एक 6 शेष कार्यसमिति के सदस्य होंगे।

8. प्रत्येक तहसील कार्यकारी मण्डल सदस्यों में से तहसील कार्यसमिति में सम्बन्धित जिला सभा कार्यसमिति द्वारा एक सदस्य मनोनीत किया जावेगा। जिसे अन्य सदस्यों की भांति सभी अधिकार प्राप्त होंगे। जिला संगठन के विधान की धारा 11 (क) में वर्णित सभी सदस्य जो तहसील क्षेत्र में निवास करते हैं, वे सभी तहसील कार्यसमिति के पदेन सदस्य होंगे।

9. जिला सभा कार्यकारी मण्डल में प्रत्येक तहसील के परिवारों की संखया के आधार पर सदस्य संखया निश्चित की जावेगी। इनका चयन तहसील कार्यकारी मण्डल प्रत्येक गांव के परिवारों की संखया को ध्यान में रखकर उचित प्रतिनिधित्व देते हुए करेंगे।

10. तहसील कार्यकारी मण्डल एवं कार्यसमिति के निर्वाचन हेतु निर्वाचन प्रक्रिया, मतगणना, आचार संहिता तथा सदस्यों द्वारा नियमों का उल्लंघन व अनुशासनात्मक कार्यवाही के नियम प्रदेश एवं जिला सभा के विधान के अनुरूप होंगे।

11. प्रत्येक तहसील सभा के चुनाव हेतु कार्यक्रम बनाकर एक माह पूर्व कार्यकारी मण्डल सदस्यों की सूची उनके पतों सहित सदस्यों में प्रसारित कर आपत्तियों का निवारण कर अन्तिम सूची सम्बन्धित जिला सभा को स्वीकृति हेतु भेजेगी। चुनाव प्रक्रिया में तिथि, स्थान, समय, पदों हेतु नामांकन पत्र प्रस्तुत करने, नाम वापस लेने, अन्तिम रूप से अधिकृत प्रत्याशियों की सूची प्रकाशित करने आदि की सूचना स्पष्ट रूप से प्रकाशित की जानी अनिवार्य होगी। स्थानीय सभा द्वारा चयन सूची पर स्थानीय सभा के अध्यक्ष, मंत्री तथा तहसील सभा के पर्यवेक्षकों के हस्ताक्षर आवश्यक है स्थानीय सभा के चयन प्रक्रिया कार्य विवरण की फोटो कॉपी उपरोक्त पत्रों के साथ संलग्न की जावें।

12. तहसील कार्यसमिति के चुनाव कराने हेतु जिला सभा से पर्यवेक्षक बुलाना अनिवार्य होगा। उसकी मौजूदगी में चुनाव कराए जावेंगे। पर्यवेक्षक को इस चुनाव से सम्बन्धित सभी पत्र जिला सभा द्वारा उपलब्ध कराये जायें। चुनाव सम्पन्न होने पर उसकी रिपोर्ट जिला अध्यक्ष, मंत्री को शीघ्र सभी पत्रों के साथ प्रेषित की जावेगी।

13. प्रत्येक ग्राम को एक इकाई मानते हुए तहसील सभा को जिला सभा से सम्बद्धता प्राप्त करने के लिए जिला कार्यसमिति द्वारा निर्धारित सम्बद्धता शुल्क देना होगा।

14. तहसील सभाएं कार्य संचालन हेतु जिला सभा के विधान की भावना के अनुरूप नियम बना सकेगी। इन्हें सम्बन्धित जिला संगठन की कार्यसमिति से स्वीकृत कराना आवश्यक होगा।
शहरी क्षेत्रीय तहसील सभाएं

15. जिस शहर में १००० से अधिक परिवार रहते हैं, वहां शहरी क्षेत्रीय तहसील सभा का गठन किया जावेगा। इस हेतु शहर को परिवारों की संखया तथा भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में विभाजित किया जावेगा। प्रत्येक क्षेत्रीय सभा स्थानीय सभा के समाज ही कार्य करेगी। क्षेत्र में निवास करने वाले प्रत्येक परिवार के मुखिया अथवा उसके द्वारा नामित व्यक्ति को क्षेत्रीय सभा का सदस्य बनाया जावेगा। प्रत्येक सदस्य को जिला संगठन द्वारा निर्धारित सदस्यता शुल्क देय होगी। क्षेत्रीय सभा के गठन की प्रक्रिया स्थानीय संगठन के अनुरूप होगी। परिशिष्ट ''ब'' की धारा 3 के अनुसार भी शहरी क्षेत्रीय तहसील सभाओं का गठन किया जावेगा।

1 शहरी तहसील सभा कार्यकारी मण्डल के चयनित सदस्यों की संखया निम्न प्रकार से होगी।
(अ) जिस शहर में 1000 से 3000 परिवार रहते हैं - 101
(ब) जिस शहर में 3000 से अधिक परिवार रहते हैं - 151
(अ) जिस शहर में 500 से 1000 परिवार रहते हैं - 71 (परिशिष्ट ''ब'' की धारा 3)

2 प्रत्येक क्षेत्रीय सभा से शहरी तहसील कार्यकारी मण्डल हेतु सदस्य संखया निम्न प्रकार से तय की जावेगी।
शहरी क्षेत्र के कुल परिवारों की संखया - शहरी तहसील के कार्यकारी मण्डल के सदस्यों की संख्या ।

3 शहरी क्षेत्रीय सभा कार्यसमिति में 2000 सदस्य परिवारों तक 21१ तथा इससे अधिक परिवार होने पर 31 सदस्यों की पदाधिकारियों सहित कार्यसमिति का गठन किया जावेगा।

4 शहरी तहसील कार्यकारी मण्डल में क्षेत्रीय सभा के अध्यक्ष एवं मंत्री को भेजना आवश्यक होगा।

5 शहरी क्षेत्रीय सभाओं का सीमांकन शहरी तहसील सभा कार्यसमिति की अभिशंषा को ध्यान में रखते हुए जिला सभा कार्यसमिति द्वारा किया जावेगा।

6 शहरी तहसील सभा के गठन की अन्य प्रक्रियाएं यथा वोटर लिस्ट चयन प्रक्रिया कार्यक्रम आदि तहसील सभा के गठन के अनुसार ही है।

7 शहरी तहसील सभा प्रत्येक क्षेत्रीय सभा से जिला संगठन की कार्यसमिति द्वारा निर्धारित सम्बद्धता शुल्क प्रति सत्र लेगी एवं सम्बद्धता प्रमाण पत्र जारी करेगी।

8 शहरी क्षेत्रीय सभाएं जिला सभा कार्यकारी मण्डल हेतु सदस्यों का निर्वाचन उनको आवंटित संख्या के अनुसार करेगी।

9 शहरी क्षेत्रीय सभाओं तथा शहरी तहसील सभा के चुनावों में जिला सभा के पर्यवेक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य होगी।

10 जिन शहरी तहसील सभाओं में परिवारों की संखया 3000 से अधिक है, वहां कार्यसमिति के चुनाव हेतु प्रदेश सभा से भी पर्यवेक्षक भेजा जावेगा।

11 शहरी स्तरीय तहसील सभा में भी पदेन सदस्य उसी प्रकार से होंगे जैसा तहसील सभा गठन बिन्दु संखया 5 में दिया गया है।

12 शहरी तहसील सभा कार्यकारी मण्डल द्वारा अध्यक्ष एवं कार्यसमिति हेतु 25 सदस्यों का निर्वाचन क्षेत्रीय सभाओं को उचित प्रतिनिधित्व देते हुए किया जावेगा। अध्यक्ष के निर्वाचन के बाद नवनिर्वाचित अध्यक्ष कार्यसमिति हेतु 5 सदस्यों का मनोनयन करेंगे। कार्यसमिति के 31 सदस्य (अध्यक्ष सहित) कार्यसमिति के पदाधिकारियों का चयन करेंगे, पदाधिकारियों के पदों की संख्या एवं नाम का निर्णय शहरी तहसील सभा के विधान के अनुसार होगा।

16. महासभा द्वारा स्वीकृत मॉडल विधान के अनुसार ही प्रदेश, जिला/आंचलिक, तहसील/शहरी तहसील सभा का गठन आवश्यक होगा। ऐसा न होने पर महासभा, उस प्रदेश सभा उनके जिला व तहसील सभाओं के चुनाव अपने पर्यवेक्षकों की देखरेख में मॉडल विधान व श्रृंखलाबद्ध संगठन की भावना को ध्यान में रखते हुए करा सकेगी और इस तरह से चयनित प्रदेश सभा/जिला ही उस प्रदेश का प्रतिनिधित्व महासभा में करेगी। इस कार्य हेतु महासभा आवश्यकतानुसार विभिन्न स्तरों के लिए तदर्थ समितियों का गठन कर सकेगी।

17. अनेक प्रदेशों में स्थानीय तहसील जिला अथवा प्रदेश सभाएं संस्था रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के अन्तर्गत रजिस्टर्ड है। उन सभी संगठनों को अपने विधान एवं नियमावली में परिवर्तन मॉडल विधान के अनुसार करना होगा। अन्यथा उन्हें सम्बद्धता प्रदान नहीं की जावेगी। किसी भी विवाद में कोर्ट में जाने वाले व्यक्ति अथवा संगठन की सम्बद्धता निरस्त करने का अधिकार उसको सम्बद्धता प्रदान करने वाली सभा को होगा।

परिशिष्ट''स''
(महानगरीय आंचलिक (जिला) सभाओं के गठन की प्रक्रिया)

श्रृंखलाबद्ध संगठन को सुदृढ़ एवं गतिशील बनाने तथा प्रत्येक परिवार को संगठन की मुखय धारा से जोड ने के दृष्टिकोण से प्रदेश एवं जिला सभाओं के विधानों में परिवर्तन करना समय की आवश्यकता है। कोलकाता, दिल्ली एवं मुम्बई महानगरों को प्रादेशिक सभा के रूप में मान्यता है। इन महानगरों में क्रमश: 10, 8 और 8 आंचलिक सभाएं है, जिन्हें जिला सभा का दर्जा प्राप्त है। इन महानगरों में श्रृंखलाबद्ध संगठन की प्रथम ईकाई आंचलिक सभाएं है। सभी आंचलिक सभाओं के विधान एवं चुनाव में एक रूपता रहें तथा प्रत्येक परिवार की भागीदारी संगठन में सुनिश्चित की जा सके इस दृष्टि से उनके विधानों में परिवर्तन करना आवश्यक है। इस दृष्टि से निम्न मार्गदर्शन बिन्दु दिये जा रहें है :-

1. प्रत्येक परिवार का मुखिया अथवा उसके द्वारा नामित व्यक्ति को सम्बन्धित आंचलिक सभा का सदस्य बनाया जावेगा। प्रत्येक सदस्य से आंचलिक सभा की कार्यसमिति द्वारा निर्धारित सदस्यता शुल्क ली जावेगी। आंचलिक सभा के गठन हेतु उस क्षेत्र में रहने वाले कम से कम 40 प्रतिशत परिवारों को सदस्य बनाना आवश्यक होगा।

2. परिवार से तात्पर्य एक ही रसोईघर में भोजन करने वाले सदस्यों से है।

3. परिवार में जो व्यक्ति महिला एंव युवा संगठन का सदस्य है सामानयतः उसे क्षेत्रीय सभा की सदस्यता नहीं दी जावेगी, किन्तु यदि कोई महिला पूर्व से ही आंचलिक संगठन से सक्रिय रूप से जुडी हुई है तो उसे भी विशेष परिस्थिति में आंचलिक सभा की सदस्यता दी जा सकेगी।

4. आंचलिक सभा के सभी सदस्य मिलकर आंचलिक कार्यकारी मण्डल का गठन इस प्रकार से करेंगे कि उस आंचल की अलग-अलग बस्तियों में रहने वाले परिवारों की संखया को ध्यान में रखते हुए उन्हें आनुपातिक रूप से आंचलिक कार्यकारी मण्डल में स्थान मिल सके इस हेतु प्रदेश सभा महासभा के मार्गदर्शन से सीटों का आवंटन भी कर सकती है।

5. प्रत्येक आंचलिक कार्यकारी मण्डल के चयनित सदस्यों की संख्या 151 से अधिक नहीं होगी।

6. आंचलिक कार्यकारी मण्डल में चयनित सदस्यों के अलावा जिला संगठन के विधान की धारा

7 (च) अ में वर्णित सभी महानुभाव जो सम्बन्धित आंचलिक सभा क्षेत्र में निवास करते हैं, पदेन सदस्य होंगे।

7. उपरोक्त चयनित एवं पदेन सदस्यों का मण्डल ही उस क्षेत्र का आंचलिक कार्यकारी मण्डल कहलायेगा। पदेन सदस्यों को भी वे सभी अधिकार प्राप्त होंगे जो चयनित सदस्यों को प्राप्त है।

8. आंचलिक कार्यकारी मण्डल के सदस्यों की वैध सूची सभी आपत्तियों के निराकरण के पश्चात आंचलिक कार्यसमिति के चुनावों के एक माह पूर्व सम्बन्धित प्रदेश सभा एवं महासभा कार्यालय को सदस्यों के पूर्ण पते एवं टेलिफोन नम्बर सहित अध्यक्ष एवं मंत्री के हस्ताक्षर से भेजी जावेगी। यह सूची सम्बन्धित सदस्यों को दो रूपया प्रति पृष्ठ शुल्क लेकर उपलब्ध कराई जावेगी।

9. आंचलिक कार्यसमिति के चुनाव में प्रदेश सभा अथवा विशेष परिस्थिति में महासभा के पर्यवेक्षक उपस्थित रहेंगे चुनाव सम्बन्धी सारा कार्यक्रम एवं नियमादि चुनाव आचार संहिता के अनुरूप होंगे।

10. आंचलिक सभा द्वारा संगठन के कार्यों को सुगमता से संचालन हेतु जिला संगठन के विधान की धारा 11 (क) के अनुसार पदाधिकारियों एवं कार्यसमिति का चयन करेगी।

11. आंचलिक सभा के चुनाव सम्बन्धी सारा विवरण प्रदेश एवं महासभा कार्यालय को चुनाव सम्पन्न होने के पश्चात तत्काल ही पर्यवेक्षक के हस्ताक्षर सहित भेजा जायेगा।

12. आंचलिक सभा को प्रदेश सभा से सम्बद्धता प्राप्त करना होगा, इसके लिए प्रदेश सभा की कार्यसमिति द्वारा निर्धारित सम्बद्धता शुल्क प्रति सत्र देना होगा।

13. अन्य नियम जिला सभाओं के अनुसार ही है।



 

 


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